Jharkhand Heart Surgery रांची: झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक खास अभियान चलाया जा रहा रहा है जिसमें लगतार सफलता मिल रही है. इस अभियान के कहत एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है. अभियान के तहत अब तक झारखंड के 91 बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी हो चुकी है. इन बच्चों को बेहतर इलाज के लिए झारखंड से केरल के कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल भेजा गया था. अब तक कुल 98 बच्चों को इलाज के लिए कोच्चि भेजा जा चुका है.
इस अभियान का उद्देश्य राज्य में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक स्थिति इलाज में बाधा न बने और किसी बच्चे को बीमारी के कारण अपना भविष्य प्रभावित न करना पड़े.
Jharkhand Heart Surgery : कोच्चि में बच्चों और अभिभावकों से मिले NHM अभियान निदेशक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने शनिवार को कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की. उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य और इलाज की प्रगति की जानकारी ली.
इस दौरान उन्होंने बच्चों के इलाज में जुटी चिकित्सकीय टीम के साथ अभियान में सहयोग कर रही संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल इलाज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा उद्देश्य झारखंड के हर उस बच्चे तक पहुंचना है, जो जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है और जिसे उपचार की जरूरत है.
‘कोई बच्चा इलाज से वंचित न रहे’
शशि प्रकाश झा ने कहा कि अभियान का लक्ष्य झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित हर बच्चे को इलाज उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा केवल जानकारी के अभाव, आर्थिक परेशानी या इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए.
उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की पहचान करने की अपील की, जिनमें जन्मजात हृदय रोग की समस्या हो सकती है. समय पर बीमारी की पहचान होने से बच्चों का उपचार जल्द शुरू किया जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचने की संभावना बढ़ जाती है.
अभिभावकों से अपील- कम से कम पांच बच्चों को इलाज के लिए प्रेरित करें
अभियान को और व्यापक बनाने के लिए शशि प्रकाश झा ने अभिभावकों से विशेष अपील की. उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभिभावक अपने क्षेत्र में कम से कम पांच ऐसे बच्चों की पहचान और मदद करें, जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी है.
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे ऐसे मामलों में अपने क्षेत्र के सांसद, विधायक और मुखिया से भी संपर्क करें, ताकि जरूरतमंद बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और उपचार की सुविधा से जोड़ा जा सके.
अभियान निदेशक के मुताबिक, जितने अधिक बच्चों की समय पर पहचान होगी, उतने ही अधिक बच्चों को सही समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा.
झारखंड में ही हो हार्ट सर्जरी की व्यवस्था
कोच्चि में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शशि प्रकाश झा ने अमृता अस्पताल प्रबंधन से झारखंड में भी इसी तरह की चिकित्सा व्यवस्था शुरू करने की दिशा में सहयोग का आग्रह किया.
उनका कहना था कि यदि राज्य में ही जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए विशेषज्ञ उपचार और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो आने वाले समय में बच्चों और उनके परिवारों को इलाज के लिए दूसरे राज्य की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी.
इससे उपचार की प्रक्रिया आसान होने के साथ-साथ बच्चों और उनके अभिभावकों पर यात्रा से जुड़ा अतिरिक्त बोझ भी कम होगा.
अमृता अस्पताल में मुफ्त सर्जरी, रहने और खाने की भी व्यवस्था
इस अभियान में अमृता अस्पताल और अमृता फाउंडेशन की भूमिका महत्वपूर्ण है. अस्पताल और फाउंडेशन की ओर से बच्चों की निःशुल्क हार्ट सर्जरी के साथ-साथ उनके अभिभावकों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है.
शशि प्रकाश झा ने इस सहयोग के लिए अमृता अस्पताल और अमृता फाउंडेशन का आभार जताया. उन्होंने अभियान में रोटरी कोच्चि के सहयोग की भी सराहना की
उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों का सहयोग ऐसे अभियानों को ज्यादा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर चल रहा अभियान
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए यह अभियान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश और स्वास्थ्य विभाग की पहल पर संचालित किया जा रहा है. कार्यक्रम की निगरानी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की देखरेख में की जा रही है.
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है.
91 बच्चों की सर्जरी बनी उम्मीद की मिसाल
झारखंड से कोच्चि भेजे गए 98 बच्चों में से 91 की हार्ट सर्जरी पूरी हो चुकी है. यह अभियान उन परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है, जो अपने बच्चों के हृदय रोग का महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं थे.
अब अभियान के अगले चरण में ज्यादा से ज्यादा बच्चों की पहचान और स्क्रीनिंग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित किसी भी बच्चे को समय पर इलाज से वंचित न रहना पड़े.
बच्चों के अभिभावकों को किया गया सम्मानित
कोच्चि में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमृता अस्पताल की ओर से इलाज करा रहे बच्चों के अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकों और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की गई.
बच्चों के इलाज में डॉ. बृजेश, डॉ. कृष्ण कुमार और उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया.

