Instagram Reel साहिबगंज/कोझिकोड : कहते हैं कि अपनों की पहचान चेहरे से होती है, नाम से नहीं. झारखंड के साहिबगंज के यासीन शेख की कहानी इसका भावुक उदाहरण है. करीब 9 साल पहले घर से लापता हुआ यासीन जब केरल में मिला तो उसकी पहचान बदल चुकी थी. वहां उसे ‘रशीद’ के नाम से जाना जाता था. परिवार ने वर्षों तक उसे तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.
फिर Instagram की महज 10 सेकंड की एक Reel ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद परिवार ने शायद छोड़ दी थी. वीडियो में तिरंगा हाथ में लिए मुस्कुराते युवक को यासीन के एक रिश्तेदार ने पहचान लिया. इसके बाद जांच हुई और सामने आया कि केरल में रह रहा ‘रशीद’ कोई और नहीं, बल्कि 9 साल से लापता यासीन शेख ही है.
Instagram Reel:2017 में दोस्तों के साथ निकला था यासीन
यासीन शेख वर्ष 2017 में झारखंड के नारायणपुर गांव में अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए घर से निकला था. उस वक्त उसकी उम्र करीब 26 साल थी, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटा.
परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की. कई जगह पूछताछ की गई, लेकिन यासीन का कोई पता नहीं चला. आखिरकार परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई.
समय बीतता गया और परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई.
केरल में मिला तो अपनी पहचान तक नहीं बता पाया
उधर, उसी साल केरल के कोझिकोड जिले के चेरुवाडी गांव में स्थानीय लोगों ने एक युवक को इधर-उधर घूमते देखा. युवक अपना नाम और घर का पता ठीक से नहीं बता पा रहा था.
मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. इसके बाद युवक को जिला बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. उस समय वह देखने में काफी कम उम्र का लग रहा था.
समिति के निर्देश पर उसे एक देखभाल केंद्र में रखा गया. वहां उसकी देखभाल तो होती रही, लेकिन उसकी असली पहचान का पता नहीं चल सका.
बोलने में परेशानी बनी पहचान की सबसे बड़ी बाधा
युवक ठीक से बोल नहीं पाता था. उसकी आवाज और बोलने का तरीका ऐसा था कि उसकी बातें समझना मुश्किल होता था. वह अपना नाम और घर का पता भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पाता था.
बाद में, क्योंकि शुरुआती देखभाल केंद्र 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए था, उसे वर्ष 2023 में कोझिकोड के कट्टीपारा स्थित करुण्यतीरम केंद्र भेज दिया गया. यह विशेष जरूरतों वाले लोगों के लिए काम करने वाली संस्था है.
यहीं अधिकारियों ने उसका नाम ‘रशीद’ रख दिया.
कैमरे के सामने आते ही खिल उठता था चेहरा
करुण्यतीरम में रहने के दौरान रशीद को कैमरे के सामने आना काफी पसंद था. किसी कार्यक्रम में कैमरा दिखाई देता तो वह उसके सामने आ जाता.
वह केंद्र के कई कार्यक्रमों में शामिल हुआ. यहां तक कि ‘वन स्माइल’ नाम की एक शॉर्ट फिल्म में भी नजर आया.
बाहर से उसकी जिंदगी सामान्य होती जा रही थी, लेकिन उसके भीतर अपने घर और परिवार की याद अब भी थी. वह अक्सर अपनी मां और गांव का जिक्र करता था. वह घर लौटना चाहता था, लेकिन समस्या यह थी कि किसी को यह पता नहीं था कि उसका असली घर कहां है.
15 अगस्त को बना वह वीडियो, जिसने बदल दी जिंदगी
यासीन की जिंदगी में असली मोड़ 15 अगस्त को आया. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पेवुंडारा यासिर करुण्यतीरम पहुंचे थे.
उन्होंने वहां रशीद और उसके साथियों का एक छोटा वीडियो बनाया. वीडियो में रशीद हाथ में तिरंगा लिए मुस्कुराता हुआ दिखाई दे रहा था.
यासिर ने इस वीडियो को Instagram पर पोस्ट कर दिया.
10 सेकंड की Reel पहुंची लाखों लोगों तक
महज करीब 10 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. Reel को 10 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा.
इन्हीं दर्शकों में यासीन का एक रिश्तेदार भी शामिल था. जैसे ही उसकी नजर वीडियो में मुस्कुराते युवक पर पड़ी, उसे शक हुआ कि यह वही यासीन हो सकता है जो 9 साल पहले घर से लापता हुआ था.
रिश्तेदार ने Instagram पर कमेंट किया. इसके बाद परिवार ने करुण्यतीरम केंद्र से संपर्क साधा.
यहीं से शुरू हुई पहचान की उस कड़ी की जांच, जिसने नौ साल पुराना रहस्य सुलझा दिया.
दस्तावेजों से खुला ‘रशीद’ का असली राज
परिवार ने यासीन का आधार कार्ड और दूसरे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए. इसके बाद केरल और झारखंड के अधिकारियों ने उपलब्ध जानकारी और दस्तावेजों का मिलान किया.
जांच के बाद पुष्टि हुई कि केरल में ‘रशीद’ के नाम से रह रहा युवक वास्तव में साहिबगंज का यासीन शेख ही है.
नौ साल से परिवार से दूर यासीन आखिरकार अपने लोगों तक पहुंच गया.
वीडियो कॉल पर पिता और भाई-बहनों से हुई बात
पहचान की पुष्टि के बाद यासीन ने अपने पिता सोहराब शेख और भाई-बहनों से वीडियो कॉल पर बात की. परिवार के लिए यह बेहद भावुक क्षण था.
यासीन को घर लाने के लिए उसका छोटा भाई अजुल शेख खुद केरल पहुंचा. करीब 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अब यासीन अपने घर लौट रहा है.
मां से मिलने की खुशी अधूरी रह गई
इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस मां को यासीन इतने वर्षों से याद करता रहा, वह अब इस दुनिया में नहीं हैं.
यासीन की मां का 2023 में निधन हो गया था. परिवार के मुताबिक वह अपने बेटे के लौटने का इंतजार करती रहीं.
यासीन आखिरकार घर पहुंच रहा है, लेकिन उसकी मां अब उसे गले लगाने के लिए वहां नहीं होंगी.
एक मुस्कान ने खत्म कर दी 9 साल की तलाश
यासीन की कहानी में सबसे खास बात यह है कि जिस पहचान को तलाशने में परिवार और व्यवस्था के सालों गुजर गए, उसे आखिरकार एक 10 सेकंड की Instagram Reel ने सामने ला दिया.
एक छोटी सी वीडियो, एक मुस्कान और रिश्तेदार की पहचान ने 9 साल से बिछड़े बेटे को उसके परिवार तक पहुंचा दिया.
यासीन के लिए ‘रशीद’ नाम से शुरू हुई जिंदगी अब फिर से उसके अपने नाम और अपने घर तक पहुंच गई है. हालांकि घर वापसी की इस खुशी में मां की कमी हमेशा एक दर्द बनकर साथ रहेगी.

