TMC controversy: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) को सोमवार तक जवाब देने का निर्देश दिया कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के विरोधी गुटों के बीच पार्टी के सिंबल और नाम को लेकर चल रहे तीखे विवाद पर फैसला करने में कितना समय लगेगा.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि ECI के पास अंतरिम आदेश जारी करने का अधिकार है, क्योंकि राज्य में उपचुनावों की घोषणा हो चुकी है.
TMC controversy: हम उपचुनावों को नहीं छू सकते- SC
बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, ने कहा, “यहां समाधान यह है कि ECI को अगला चुनाव होने से पहले जल्द से जल्द आखिरी फैसला लेना चाहिए. आज चुनाव हो रहे हैं, नए सिंबल दिए गए हैं, और उम्मीदवारों ने अपने नॉमिनेशन फाइल कर दिए हैं. साफ है, हम उपचुनावों को नहीं छू सकते.”
ममता पार्टी सिंबल फ्रीज होने पर पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट
AITC की फाउंडर ममता ने 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जब ECI ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजिनगर में होने वाले उपचुनावों के लिए पार्टी की असली पहचान को फ्रीज करने के 17 सितंबर के अंतरिम आदेश के बाद दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और सिंबल दिए.
सोमवार तक बताये टीएमसी विवाद निपटाने में कितना समय लगेगा- कोर्ट
बेंच ने ECI की ओर से पेश सीनियर वकील दामा सेसादरी नायडू से कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि कमीशन इस विवाद पर फैसला करने में कितना समय लेगा.
बेंच ने कहा, “हम चाहते हैं कि आप हमें एक सही समय बताएं जिसमें पार्टियों को सही मौका दिया जाए, लेकिन कार्रवाई को लंबा न खींचा जाए. हम यह भी जानना चाहते हैं कि आपको विवाद पर फैसला करने का मौका कितने समय में मिलेगा.”
कोर्ट ने नायडू को निर्देश लेने देने के लिए मामले की सुनवाई सोमवार के लिए टाल दी.
क्या ECI को अक्टूबर में मुख्य विवाद पर फैसला करने के लिए कहा जाए- कपिल सिब्बल
ममता की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि वह चुनावों पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने शिकायत की कि ममता बनर्जी की लीडरशिप वाली TMC ने जून में ECI से संपर्क किया था, जिसने सितंबर में एक अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी को उसके सिंबल, “फूल और घास” सिंबल और नाम से वंचित कर दिया था.
सिब्बल ने कहा, “अगर ऐसे ऑर्डर पास करने दिए गए, तो वे हर चुनाव के बीच में पास किए जाएंगे. राज्य में म्युनिसिपल चुनाव नवंबर में होने वाले हैं. मेरी बस एक रिक्वेस्ट है कि क्या ECI को अक्टूबर में मुख्य विवाद पर फैसला करने के लिए कहा जा सकता है.”
कोर्ट ने सिब्बल से क्या पूछा
कोर्ट ने सिब्बल से पूछा, “ऑर्डर गैर-कानूनी हो सकता है या सही; हमें नहीं पता. लेकिन ऐसी स्थिति में ECI क्या कर सकता था? ECI, जिसके पास फाइनल ऑर्डर पास करने का अधिकार है, क्या वह अंतरिम ऑर्डर पास नहीं कर सकता? आप भी अगस्त में ECI के सामने मामले के पेंडिंग होने पर हमसे संपर्क कर सकते थे.”
बेंच ने कहा कि एक संभावित समाधान यह हो सकता है कि ECI इस मुद्दे पर रोज़ाना और पूरी सुनवाई करे.
रोज़ाना और पूरी सुनवाई का रीताब्रत बनर्जी गुट ने किया विरोध
रीताब्रत बनर्जी और अरूप रॉय की लीडरशिप वाले AITC के विरोधी गुट की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी और नीरज किशन कौल ने इस सुझाव का विरोध किया.
रोहतगी ने कहा कि ऐसे मामलों में सबूत पेश करने होते हैं, जिसमें समय लगता है, और ECI के पास इस केस के अलावा और भी काम हैं. शिवसेना और AIADMK के विरोधी गुटों से जुड़े पिछले केसों के अनुभव का हवाला देते हुए, रोहतगी ने कहा कि ECI को कुछ “ब्रेकिंग स्पेस” दिया जाना चाहिए. कौल ने भी कोर्ट को बताया कि एक महीने में मामले पर फैसला करना प्रैक्टिकली नामुमकिन है.
कोर्ट ने विरोधी गुट के वकीलों से कहा कि संबंधित पार्टियों को सहयोग करना चाहिए. बेंच ने कहा, “आपको पिटीशनर के साथ इस मामले में शामिल होना चाहिए. आपके लिए बेहतर होगा कि मामले पर जल्द फैसला हो. देरी से दोनों पक्षों का फायदा पक्का नहीं होगा.”
सिंबल फ्रीज करने पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ था कोर्ट
इस हफ़्ते की शुरुआत में, कोर्ट ने सिब्बल की अर्ज़ी पर ममता की पिटीशन को लिस्ट करने की इजाज़त दी. सिब्बल ने बताया कि जून में ECI की तरफ़ से शुरू की गई कार्रवाई के बावजूद, पोल पैनल ने फ़ाइनल फ़ैसले के बिना बीच प्रोसेस में ही पार्टी सिंबल फ़्रीज़ कर दिया है.
कोर्ट इस बात पर सहमत हुआ कि कानून का सवाल बना हुआ है कि क्या ECI फ़ाइनल फ़ैसले के बिना कोई अंतरिम ऑर्डर पास कर सकता है.
एक अंतरिम उपाय के तौर पर, ECI ने रीताब्रत बनर्जी और अरुण रॉय की लीडरशिप वाले विरोधी गुट को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” के तौर पर मान्यता दी है और उसे “लिफ़ाफ़ा” सिंबल दिया है.
इसी तरह, पोल पैनल ने ममता की लीडरशिप वाले गुट का नाम “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” रखा है और उसे “फ़ुटबॉल प्लेयर” सिंबल दिया है.
TMC की बगावत
पश्चिम बंगाल असेंबली स्पीकर रथिंद्र नाथ बोस ने रीताब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाले जाने के बाद लीडर ऑफ़ द अपोज़िशन (LoP) के तौर पर मान्यता दी. ममता बनर्जी गुट ने इस पोस्ट के लिए सोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम दिया था. इसने अपने 78 विधायकों में से दो, रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निकाल दिया, इससे पहले कि उनमें से 57 ने बगावत कर दी और 15 साल बाद TMC के सत्ता खोने के बाद LoP के तौर पर रीताब्रत बनर्जी का समर्थन किया. उन्होंने पार्टी के “फूल और घास” निशान, उसके नाम और ऑर्गेनाइज़ेशनल कंट्रोल पर अपना अधिकार जताया.
TMC के 20 बागी सांसदों ने कम जानी-मानी नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया में मिलकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस का साथ दिया.
3 जून को, बोस ने 58 बागी TMC विधायकों को मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर मान्यता दी और रीताब्रत बनर्जी और साहा को LoP और डिप्टी LoP बनाया. यह तब हुआ जब BJP पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई, उसने 294 में से 207 सीटें जीतीं. TMC की सीटें घटकर 80 रह गईं.
ममता बनर्जी की TMC के पास नौ राज्यसभा सदस्य बचे थे, जब जून में सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया, BJP में शामिल हो गए और 24 जुलाई को ऊपरी सदन के लिए फिर से चुने गए. TMC के चौथे राज्यसभा सदस्य, एक्टर कोयल मलिक ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया.
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