ईरान के परमाणु ठिकानों का राज बताओ,अमेरिका देगा 20 मिलियन डॉलर- ट्रंप का ऐलान

Iran Nuclear Program Reward वॉशिंगटन : ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है.अमेरिकी सरकार ने ईरान के परमाणु ठिकानों, वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और इस कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों एवं अन्य कर्मियों के बारे में जानकारी देने वाले व्यक्ति को 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 177 करोड़ रुपये तक का इनाम देने की पेशकश की है. इसके साथ ही  ये भी कहा गया है कि खुफिया सूचना देने वाले व्यक्ति को जरूरत पड़ने पर किसी दूसरी जगह सुरक्षित रूप से बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ (Rewards for Justice) कार्यक्रम के तहत यह पेशकश की गई है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा की. इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

खास बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं. ऐसे में परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल करने के लिए इतनी बड़ी इनामी राशि की पेशकश को अमेरिकी रणनीति के अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.

किन जानकारियों पर मिलेगा 20 मिलियन डॉलर का इनाम?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, यह इनाम ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कई तरह की सूचनाओं के लिए रखा गया है. इसमें मुख्य रूप से निम्न जानकारियां शामिल हैं:

  • ईरान में मौजूद परमाणु ठिकानों और सुविधाओं की जानकारी.

  • परमाणु कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और तकनीक का विवरण.

  • परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों और अन्य कर्मचारियों की पहचान.

  • परमाणु सामग्री और उपकरणों की आवाजाही से संबंधित जानकारी.

  • परमाणु गतिविधियों में शामिल संगठनों और उनसे जुड़े लोगों का विवरण.

अमेरिका का उद्देश्य इन जानकारियों के जरिए ईरान के परमाणु ढांचे और उससे जुड़े नेटवर्क की पहचान करना है. हालांकि, हर सूचना पर अधिकतम 20 मिलियन डॉलर का भुगतान सुनिश्चित नहीं है. इनाम की पात्रता और राशि का फैसला अमेरिकी कार्यक्रम के नियमों के तहत किया जाएगा.

IAEA की रिपोर्ट में क्या सामने आया था?

अमेरिका की इस पेशकश के पीछे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है. IAEA की 2025 की रिपोर्ट में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान यूरेनियम को 60 फीसदी तक संवर्धित कर चुका था. यह स्तर परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले लगभग 90 फीसदी संवर्धित यूरेनियम के काफी करीब माना जाता है.

IAEA के 31 मई 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित 408.6 किलोग्राम यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF6) का भंडार था. एजेंसी ने इस मात्रा को लेकर भी चिंता जताई थी.

विशेषज्ञों का आकलन है कि इतनी मात्रा में मौजूद 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम को और अधिक संवर्धित किया जाए तो यह कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध करा सकता है. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ईरान ने परमाणु हथियार बना लिए हैं. यूरेनियम संवर्धन और वास्तविक परमाणु हथियार निर्माण दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.

क्या होता है यूरेनियम संवर्धन और 60 फीसदी शुद्धता का मतलब ?

यूरेनियम एक रेडियोधर्मी धातु है, जिसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने के साथ-साथ परमाणु हथियारों में भी किया जा सकता है. प्राकृतिक यूरेनियम में यूरेनियम-235 की मात्रा बहुत कम होती है. परमाणु रिएक्टर और हथियारों के लिए इसकी मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया को यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कहा जाता है.

इसके लिए सेंट्रीफ्यूज नाम की विशेष मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. ये मशीनें यूरेनियम के अलग-अलग समस्थानिकों को अलग करने में मदद करती हैं.

आमतौर पर:

  • करीब 3 से 5 फीसदी संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली उत्पादन करने वाले कई परमाणु रिएक्टरों में होता है.

  • 20 फीसदी संवर्धन को उच्च स्तर का संवर्धन माना जाता है.

  • 60 फीसदी संवर्धन बेहद उच्च स्तर की श्रेणी में आता है.

  • करीब 90 फीसदी संवर्धित यूरेनियम को आमतौर पर हथियार-ग्रेड यूरेनियम कहा जाता है.

इसलिए 60 फीसदी तक यूरेनियम संवर्धित करने की ईरान की क्षमता अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय रही है.

IAEA को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पूरी जानकारी क्यों नहीं मिल पा रही?

अमेरिकी नोटिस में ईरान की ओर से IAEA के साथ सुरक्षा संबंधी समझौतों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान की ओर से सुरक्षा संबंधी दायित्वों का पालन नहीं किए जाने के कारण IAEA को उसके परमाणु कार्यक्रम के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों की निगरानी और जानकारी जुटाने में मुश्किल हो रही है.

खासतौर पर सेंट्रीफ्यूज के उत्पादन और उनके कुल भंडार से संबंधित जानकारी की निरंतरता प्रभावित हुई है.

यहां ‘Continuity of Knowledge’ का मतलब है कि IAEA किसी देश की परमाणु सामग्री और उससे जुड़े उपकरणों की स्थिति, मात्रा और आवाजाही पर लगातार निगरानी बनाए रख सके. इस निगरानी में किसी तरह का अंतर आने पर यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि परमाणु सामग्री कहां है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है.

यही वजह है कि अमेरिका अपने इनामी कार्यक्रम के जरिए ऐसी जानकारियां हासिल करना चाहता है, जिनसे ईरान के परमाणु ढांचे की स्थिति स्पष्ट हो सके.

क्या है अमेरिका का Rewards for Justice कार्यक्रम?

‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ अमेरिकी विदेश मंत्रालय का एक विशेष इनामी कार्यक्रम है. इसकी शुरुआत वर्ष 1984 में हुई थी. इसका उद्देश्य आतंकवाद और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना है.

इस कार्यक्रम के तहत जानकारी देने वाले लोगों को आर्थिक इनाम दिया जाता है. कुछ मामलों में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मामले में भी अमेरिका ने इसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया है. इच्छुक लोग कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट के रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से जानकारी साझा कर सकते हैं. इसके लिए सुरक्षित संचार माध्यम भी उपलब्ध कराए गए हैं.

ट्रंप के दावों और नई इनामी पेशकश के बीच क्या है कनेक्शन?

इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले के बयानों से जुड़ा है. ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.

इसके बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्रालय अब ईरान के परमाणु ठिकानों, उपकरणों और वैज्ञानिकों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए 20 मिलियन डॉलर तक का इनाम दे रहा है.

यह दोनों घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करते हैं कि अमेरिकी एजेंसियां ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति और उसकी वास्तविक क्षमताओं के बारे में कितनी जानकारी हासिल कर पाई हैं.

हालांकि, इनाम की घोषणा अपने आप में यह साबित नहीं करती कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सक्रिय रूप से पहले की स्थिति में लौट आया है या अमेरिकी हमलों का कोई असर नहीं हुआ. इसका उद्देश्य उपलब्ध खुफिया जानकारी को और मजबूत करना भी हो सकता है.

अब ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर

अमेरिका की इस घोषणा से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से जारी तनाव में एक नया पहलू जुड़ गया है. परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है. अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़े प्रतिबंधों और निगरानी की मांग करता रहा है, जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है.

ऐसे में 20 मिलियन डॉलर की इनामी पेशकश आने वाले दिनों में कूटनीतिक और रणनीतिक चर्चाओं का विषय बन सकती है.

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