Uttarakhand Pravasi Sammelan 2026 देहरादून : उत्तराखण्ड के विकास में प्रवासी उत्तराखण्डियों की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें अपनी जन्मभूमि से जोड़ने के उद्देश्य से 13 नवंबर को देहरादून में तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए.

यह सम्मेलन दून विश्वविद्यालय के डॉ. नित्यानन्द ऑडिटोरियम में आयोजित होगा. इसमें देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी उत्तराखण्डियों की उपलब्धियों, अनुभवों और प्रदेश के विकास में उनकी संभावित भूमिका पर चर्चा की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डी अपनी प्रतिभा, मेहनत और उपलब्धियों से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं. उनके अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उत्तराखण्ड के विकास में लिया जाना चाहिए.
निवेश, पर्यटन और रोजगार में प्रवासियों की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश और प्रवासियों के बीच स्थायी जुड़ाव मजबूत किया जाना चाहिए.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ सार्थक संवाद की व्यवस्था हो. उनके सुझावों को गंभीरता से सुना जाए और राज्य के विकास में उनके योगदान की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए.
मुख्यमंत्री ने प्रवासियों को उत्तराखण्ड में निवेश, स्वरोजगार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही. उनका मानना है कि देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे उत्तराखण्ड के लोगों का अनुभव प्रदेश के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.
‘विकसित उत्तराखण्ड में प्रवासियों की भूमिका’ पर होगा विशेष सत्र
सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे. इनमें सबसे महत्वपूर्ण सत्र ‘विकसित उत्तराखण्ड में प्रवासियों की भूमिका’ विषय पर होगा.
इस सत्र में प्रदेश के विकास की प्राथमिकताओं और उनमें प्रवासी उत्तराखण्डियों की भागीदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा. निवेश, उद्यमिता, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में प्रवासियों के अनुभवों का लाभ लेने पर भी चर्चा होगी.
इसके अलावा ‘हौसलों की उड़ान : उत्तराखण्ड के युवा संघर्ष से सफलता के शिखर तक’ विषय पर भी संवाद आयोजित किया जाएगा. इस सत्र के जरिए युवाओं की संघर्षपूर्ण यात्राओं, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा.
लोकसंस्कृति और परंपराओं की दिखेगी झलक
मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि सम्मेलन में उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए.
उन्होंने कहा कि आयोजन में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान की प्रभावी झलक दिखाई देनी चाहिए, ताकि विदेशों और दूसरे राज्यों में रहने वाले उत्तराखण्डी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ाव महसूस कर सकें.
इसके लिए आयोजन स्थल पर आवश्यक सांस्कृतिक व्यवस्थाओं के साथ स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है.
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सम्मेलन से संबंधित सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं. आयोजन स्थल पर स्वच्छता, सुरक्षा, यातायात और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने और प्रत्येक व्यवस्था के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने को कहा. मुख्यमंत्री ने तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और आयोजन से पहले सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के निर्देश भी दिए.
बैठक में ये अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और आर. मीनाक्षी सुंदरम उपस्थित रहे.
इसके अलावा उत्तराखण्ड प्रवासी परिषद के उपाध्यक्ष पूरन चन्द्र नैलवाल और ओम प्रकाश भट्ट, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार और युगल किशोर पंत भी बैठक में मौजूद रहे.
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह और प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ के सदस्य सुधीर चन्द्र नौटियाल समेत संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे.
प्रवासी उत्तराखण्डियों को प्रदेश के विकास से जोड़ने की पहल
उत्तराखण्ड के बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के सिलसिले में देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में रहते हैं. इनमें कई लोग उद्योग, तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा, पर्यटन और कारोबार जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं.
ऐसे में प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन राज्य के लिए उनके अनुभव, विशेषज्ञता और निवेश की संभावनाओं को एक मंच पर लाने का अवसर है. मुख्यमंत्री धामी ने भी सम्मेलन को परिणामोन्मुखी बनाने पर जोर दिया है.
अब देखना होगा कि 13 नवंबर को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखण्डियों के सुझावों से प्रदेश के विकास के लिए कौन-सी नई पहल और योजनाएं सामने आती हैं और उनके योगदान को जमीन पर उतारने के लिए क्या कार्ययोजना तैयार होती है.

