Udhayanidhi Stalin hate speech : तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के द्वारा 2023 में सनातन धर्म पर दिये गये बयान को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने स्टालिन के द्वारा दिये गये बयान को नफरती करार दिया है. कोर्ट ने अपनी टिप्पमी मे कहा कि ‘इस तरह की भाषा नफरत फैलाने वाले भाषण (Hate Speech) की श्रेणी में आती है.’
#NewsPunch | मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर टिप्पणी को “घृणास्पद भाषण” कहा और चेतावनी दी है कि यह अनुयायियों को ख़तरे में डाल सकता है। इस बीच, अदालत ने भाजपा नेता अमित मालवीय के ख़िलाफ़ संबंधित विवाद में एफआईआर को रद्द कर दिया,… pic.twitter.com/73UdgTxPLd
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) January 21, 2026
Udhayanidhi Stalin hate speech: हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
स्टालिन के बयान को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट ने कहा कि “डीएमके और उससे पहले द्रविड़ आंदोलन से जुड़े संगठनों की ओर से भी पिछले 100 वर्षों में हिंदू धर्म पर बैचारिक रुप से कई बार खुले में हमला किया जाता रहा है. ऐसी ही वैचिरिक वरोध वारी विचारधारा से उदयनिधि स्टालिन भी आते हैं, इसलिए प्रमुख नेता के बयान को इतने हल्के में नहीं लिया जा सकता है.
स्टालीन के सनातन विरोधी बयान पर कोर्ट की चिंता
सनातन के विरोध को गंभीर बताते हुए कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार लोग हेट स्पीच देकर बच निकलते हैं, लेकिन उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देने वालों के उपर कानूनी कार्रवाई कर दी जाती है. कोर्ट ने कहा कि ‘यह स्थिति लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है.’
स्टालिन पर अब तक दर्ज नहीं हुआ कोई केस
हिंदूवादी संगठन हिंदू मुन्नानी (Hindu Munnani) के द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने ये भी नोट किया कि उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ उनके सनातन विरोधी बयान को लेकर तमिलनाडु में अबतक कोई FIR दर्ज नहीं हुआ है, जबकि दूसरे राज्यों में इस तरह के मामले में कार्रवाई के कई केस सामने आए हैं. अदालत ने इसे कानून के समान प्रयोग के सिद्धांत से जुड़ा अहम सवाल बताया. आपको बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने स्टालिन की स्पीच पर टिप्पणी करने वाले भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय के खिलाफ FIR को रद्द करने का भी आदेश दिया है.
स्टालिन ने सनातन धर्म पर दिया था कौन सा बयान ?
तमिलनाडु में उपमुख्यमंत्री रहते हुए एक सभा के दौरान उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी. इन बीमारियों से तुलना करते हुए स्टालिन ने कहा था कि ‘कुछ चीजों का विरोध नहीं, बल्कि उसे जड़ से मिटा देना चाहिए.’
बयान में नरसंहार (जीनोसाइड) का संकेत – हाईकोर्ट
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी मे कहा कि उदयनिधि स्टालिन के द्वारा इस्तेमाल की गई शब्दावली सांस्कृतिक नरसंहार यानी Cultural Genocide की ओर इशारा करती है और ऐसै बयान को हल्के मे नहीं लिया जा सकता है. अदालत ने कहा कि अगर किसी धर्म को मानने वाले लोगों के अस्तित्व को खत्म करन की बात हो रही हो तो उसे केवल एक राय नहीं माना जा सकता है.
मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अलग
हालांकि जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. इसके बावजूद मद्रास हाईकोर्ट की मौजूदा टिप्पणी को तमिलनाडु की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है.

