महिला आरक्षण पर संसद में वोटिंग आज, बिल पारित नहीं हुआ तो करना होगा 2034 तक इंतजार

Women’s Reservation Bill : नई दिल्ली: देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है. केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ (Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2026 Notification) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा. हालांकि, कानून लागू होने के बावजूद महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत सीटों का वास्तविक लाभ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इसे 2024 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया है. इसका सीधा अर्थ यह है कि आरक्षण का जमीनी असर साल 2034 के चुनावों से ही दिखने की उम्मीद है. हलांकि मोदी सरकार का कहना है कि अगर आज ये बिल संसद से पास हो जाता है तो सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस बिल को लागू कर देगी.

Women’s Reservation Bill पर संसद में दूसरे दिन भी चर्चा जारी 

संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में आज इस मुद्दे पर दूसरे दिन की चर्चा जारी है. पहले दिन की 13 घंटे लंबी मैराथन बहस के बाद, आज तीन संशोधित विधेयकों पर विचार किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करना है. सदन की कार्यवाही के बीच विपक्ष ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब सदन में पहले से ही संशोधित बिलों पर चर्चा चल रही थी, तो सरकार ने इतनी जल्दबाजी में पुराने कानून का नोटिफिकेशन क्यों जारी किया. हालांकि, सरकारी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि कानून के तहत सरकार को इसे लागू करने की तारीख तय करने का संवैधानिक अधिकार है.

अखिलेश यादव और शशि थरूर ने उठाए गंभीर सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति को समझना बेहद मुश्किल है. उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार परिसीमन के जरिए अपने मनमुताबिक लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण करना चाहती है, ताकि भविष्य में होने वाली हार से बचा जा सके. अखिलेश ने सवाल किया कि सरकार आखिर अपनी पसंद के निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए इतनी उत्सुक क्यों है .

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन के दक्षिण बनाम उत्तर भारत के विवाद को हवा दी. थरूर ने कहा कि परिसीमन एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. उन्होंने चिंता जताई कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की राष्ट्रीय नीति का पालन किया, उन्हें अब नुकसान हो सकता है. उनके अनुसार, यह उन राज्यों को इनाम देने जैसा है जो आबादी रोकने में विफल रहे, क्योंकि सीटों की संख्या जनसंख्या के आधार पर बढ़ेगी.

विपक्ष की एकजुटता और सदन का गणित

सदन में आज का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहने वाला है. दोपहर 3 बजे कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा में अपनी बात रखेंगे, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह सरकार की ओर से जवाब देंगे. शाम 4 बजे इन महत्वपूर्ण बिलों पर वोटिंग होनी है. सदन की कार्यवाही से पहले विपक्ष ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है. संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सरकार को घेरने का खाका खींचा गया.

डीएमके सांसद कनिमोझी और जेएमएम सांसद महुआ मांझी ने भी केंद्र सरकार की कार्यशैली पर आपत्ति जताई है. कनिमोझी ने इसे केंद्र की सोची-समझी राजनीति करार देते हुए कहा कि सरकार राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज कर रही है. वहीं, जेएमएम राज्यसभा सांसद महुआ मांझी ने विशेष सत्र की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आरक्षण 2034 से पहले मिलना ही नहीं है, तो बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के बीच इस सत्र की क्या आवश्यकता थी. विपक्ष के विरोध के बीच आद शाम 4 बजे इस पर वोटिंग होगी.

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