US Iran Talks Islamabad : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं. यहाँ अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल सीजफायर की संभावनाओं को तलाशने के लिए जुटे हैं. दिलचस्प बात यह है कि कट्टर दुश्मन माने जाने वाले इन दोनों देशों के बीच बातचीत का तरीका बेहद अनोखा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही होटल में ठहरे हुए हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के आमने-सामने बैठने के बजाय अलग-अलग कमरों में मौजूद हैं. इनके बीच संवाद का जरिया पाकिस्तानी अधिकारी बने हुए हैं, जो एक कमरे से दूसरे कमरे तक संदेश पहुँचाने का काम कर रहे हैं.
US Iran Talks Islamabad:डील की सफलता पर सस्पेंस बरकरार
लेबनान में इजराइल के हमलों और सोशल मीडिया पर जारी कयासों के बीच इस वार्ता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई थी. पाकिस्तान ने इस स्थिति के लिए पूरी तैयारी कर ली है और वह दोनों पक्षों के बीच ‘शटल डिप्लोमेसी’ के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास की खाई इतनी बड़ी है कि अभी तक बातचीत का कोई औपचारिक फॉर्मेट तय नहीं हो सका है.
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका की दो टूक और ईरान की शर्त
इस पूरी बातचीत के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट का संकट बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग को हर कीमत पर खोला जाएगा, चाहे ईरान इसमें सहयोग करे या नहीं. दूसरी ओर, ईरान के 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने सावधानी भरा रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान अच्छे इरादों के साथ तो आया है, लेकिन उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. ईरान ने वार्ता की मेज पर अपनी पक्की शर्तें रखी हैं, जिसमें सबसे प्रमुख उनके प्रतिबंधित और ब्लॉक किए गए एसेट्स (संपत्ति) को रिलीज करना है.
जेडी वेंस की राजनीतिक परीक्षा और शहबाज शरीफ का बयान
अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें इस बेहद संवेदनशील मिशन के लिए भेजा है, जिसे वेंस की राजनीतिक समझ की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. वेंस ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि अगर ईरान नेक नीयती दिखाता है, तो अमेरिका दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार है. दूसरी ओर, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को ‘करो या मरो’ वाला पल करार दिया है. पाकिस्तान खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि क्षेत्र में स्थिरता पाकिस्तान के आर्थिक हितों के लिए भी जरूरी है.
तेल बाजार और वैश्विक दबाव
होर्मुज स्ट्रेट में जारी गतिरोध का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है, जिससे ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं. अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से व्यापार के लिए खुल जाए, जबकि ईरान इस रणनीतिक रूट पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है. फिलहाल स्थिति यह है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल प्रोग्राम रोकने की अमेरिकी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं अमेरिका ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब कोई ठोस डील फाइनल होगी. ऐसे में इस्लामाबाद में बंद कमरों के भीतर चल रही यह ‘परोक्ष’ बातचीत क्या रंग लाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.

