Hormuz Strait Reopens:ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला लेबनान में हुए संघर्ष-विराम (Ceasefire) के बाद लिया गया है,जिससे पिछले करीब डेढ़ महीने से समुद्र में थमी आवाजाही अब फिर से बहाल हो सकेगी.
In line with the ceasefire in Lebanon, the passage for all commercial vessels through Strait of Hormuz is declared completely open for the remaining period of ceasefire, on the coordinated route as already announced by Ports and Maritime Organisation of the Islamic Rep. of Iran.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 17, 2026
Hormuz Strait Reopens:ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की घोषणा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि लेबनान में सीजफायर के मद्देनजर अब सभी वाणिज्यिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सकेंगे. अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि यह मार्ग संघर्ष-विराम की शेष अवधि के लिए पूरी तरह खुला रहेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाज उसी समन्वित मार्ग का पालन करेंगे जिसकी घोषणा ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है.
डोनाल्ड ट्रंप ने भी फैसले की पुष्टि की
ईरान के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस खबर की पुष्टि की. ट्रंप ने बताया कि ईरान अब हर तरह के जहाजों के लिए इस जलमार्ग को खोलने पर सहमत हो गया है. गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब से ही इस मार्ग पर संकट के बादल छाए हुए थे और ईरान ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया था.
49 दिनों की नाकेबंदी का अंत
कैलेंडर के हिसाब से देखें तो 28 फरवरी 2026 से लेकर 17 अप्रैल 2026 तक, यानी पूरे 49 दिनों के बाद इस समुद्री रास्ते को खोला गया है. युद्ध की शुरुआत के साथ ही अमेरिका ने भी ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया था. अब जबकि ईरान ने अपनी तरफ से रास्ता खोल दिया है, तो वैश्विक बाजार की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है.
भारत के लिए क्यों है यह संजीवनी?
होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है. भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल आयात करता है, जिसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है. पिछले 49 दिनों में इस रास्ते के बंद होने से भारत में एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत हो गई थी, क्योंकि कतर और अन्य खाड़ी देशों से आने वाली गैस की सप्लाई रुक गई थी. भारत को मजबूरी में दूसरे विक्रेताओं की तलाश करनी पड़ी थी और कुछ जहाजों को नेवी की कड़ी सुरक्षा में वहां से निकालना पड़ा था. अब रास्ता खुलने से भारत में ईंधन की आपूर्ति फिर से सामान्य होने की उम्मीद है.

