पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल, मुस्लिम ब्रदरहुड के बहाने बांग्लादेश से नजदीकी

ढाका। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हालिया महीनों में बढ़ा कूटनीतिक और व्यापारिक मेलजोल अब आर्थिक विश्लेषकों की चिंता का विषय बनता जा रहा है। सीधी विमान सेवाओं और कराची से चट्टोग्राम बंदरगाह तक जहाजों की सीधी आवाजाही से दोनों देशों के बीच व्यापार तो बढ़ा है, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक इस रिश्ते में बांग्लादेश का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

11:1 के बड़े व्यापार असंतुलन से बांग्लादेश को घाटा

हालिया वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच का व्यापार पूरी तरह पाकिस्तान के पक्ष में झुका हुआ है। पाकिस्तान बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर सामान निर्यात कर रहा है, जबकि बांग्लादेश का पाकिस्तान को निर्यात बेहद सीमित है। 11:1 के इस भारी अंतर से साबित होता है कि बांग्लादेश पाकिस्तान के लिए केवल एक खपत का बाजार बन चुका है, जिससे उसे कोई ठोस आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है।

स्थानीय उद्योगों और जूट क्षेत्र पर गहराता संकट

पाकिस्तानी मुद्रा के अवमूल्यन के कारण वहां का कच्चा माल, विशेषकर कॉटन और टेक्सटाइल उत्पाद, काफी सस्ते दरों पर बांग्लादेश में डंप किए जा रहे हैं। इससे बांग्लादेश के घरेलू विनिर्माण उद्योगों को तगड़ी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ रही है। दूसरी ओर, बांग्लादेश के सबसे महत्वपूर्ण जूट उद्योग को भी झटका लगा है; पाकिस्तान बांग्लादेश से कच्चा जूट तो मंगवाता है, लेकिन जूट से बने अंतिम उत्पादों पर भारी आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) लगा देता है, जिससे बांग्लादेशी उत्पाद वहां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं।

आर्थिक निर्भरता बढ़ने का मंडराता खतरा

जानकारों का मानना है कि यदि इस एकतरफा व्यापार व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई और शुल्कों में संतुलन कायम नहीं किया गया, तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारिक और वित्तीय पैठ बढ़ाकर पाकिस्तान बांग्लादेश के स्थानीय बाजारों पर अपना असर बढ़ा रहा है, जिससे निपटने के लिए बांग्लादेश को अपनी व्यापार नीतियों की समीक्षा करने की सख्त जरूरत है।

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