भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने अपने सांगठनिक ढांचे को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की कवायद को काफी तेज कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए नियुक्त प्रभारियों को यह सख्त लक्ष्य दिया है कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्र के संगठन की वास्तविक स्थिति का गहराई से जायजा लें। इस दौरान ये प्रभारी बूथ स्तर से लेकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक सीधे पहुंचकर यह पता लगाएंगे कि पार्टी का संगठन वास्तव में कहां सक्रिय है और कहां कामकाज केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कांग्रेस स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, विभिन्न नेताओं के आपसी तालमेल और सांगठनिक कमजोरियों का सटीक आकलन करेगी। पार्टी ने विधानसभा प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय करते हुए यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भूमिका केवल औपचारिकता के लिए बैठकें करने या वरिष्ठ पदाधिकारियों से मौखिक जानकारी लेने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें सीधे जमीनी स्तर पर जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करना होगा। एक महीने की इस गहन पड़ताल के बाद सभी प्रभारियों को संगठन की मौजूदा स्थिति, सामने आने वाली समस्याओं और उनमें सुधार के लिए जरूरी कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को सौंपनी होगी।
बूथों पर व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर जांची जाएगी कांग्रेस की सक्रियता
विधानसभा प्रभारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि क्या जमीनी स्तर पर बूथ समितियां वास्तव में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं या उनका गठन केवल कागजों तक ही सीमित है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वे ब्लॉक, मंडल, पंचायत और वार्ड स्तर के सभी प्रमुख पदाधिकारियों के साथ आमने-सामने बातचीत करेंगे। पार्टी के विभिन्न आयोजनों और अभियानों में कार्यकर्ताओं की वास्तविक भागीदारी तथा स्थानीय स्तर पर सांगठनिक गतिविधियों की पूरी जानकारी भी जुटाई जाएगी। इस व्यापक समीक्षा प्रक्रिया से यह बात भी सामने लाने का प्रयास किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में पार्टी का संगठन मजबूत स्थिति में है और किन इलाकों में उसे नए सिरे से सक्रिय करने की आवश्यकता है। प्रदेश नेतृत्व को इस रिपोर्ट से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की असल ताकत का सही आकलन करने में काफी मदद मिलेगी।
नाराज और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से भी किया जाएगा सीधा संवाद
कांग्रेस ने अपने सभी प्रभारियों को यह विशेष निर्देश दिए हैं कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पुराने वफादार पदाधिकारियों, युवा तथा महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, तथा छात्र संगठनों से जुड़े युवाओं से भी खुलकर बातचीत करें। पिछले काफी समय से निष्क्रिय या किसी बात से नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर उनकी समस्याएं जानना भी इस पूरी जिम्मेदारी का एक अहम हिस्सा है। पार्टी यह भली-भांति समझना चाहती है कि आखिर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी में कमी आने के पीछे की मुख्य वजह क्या है और संगठन के भीतर किन मोर्चों पर सुधार किए जाने की जरूरत है। जमीनी स्तर पर सामने आने वाली इन सभी समस्याओं को संबंधित जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी के माध्यम से उच्च नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा।
आपसी गुटबाजी पर रहेगी पैनी नजर, जिला अध्यक्षों के अधिकारों में नहीं होगा हस्तक्षेप
विधानसभा प्रभारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्र के नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों, स्थानीय पदाधिकारियों के आपसी विवादों और संगठन में तालमेल की कमी से जुड़ी तमाम जानकारियों को जुटाएं। हालांकि, उन्हें यह बहुत स्पष्ट रूप से हिदायत दी गई है कि वे जिला अध्यक्षों के समानांतर कोई अलग संगठन नहीं चलाएंगे। उनकी मुख्य जिम्मेदारी केवल जमीनी समस्याओं की सही पहचान करना, संबंधित नेतृत्व के साथ उचित समन्वय स्थापित करना और समस्याओं के समाधान के लिए लगातार फॉलो-अप करने की होगी। इस नई व्यवस्था के जरिए पार्टी संगठन की आंतरिक कमियों की सटीक जानकारी हासिल करना चाहती है, लेकिन साथ ही जिला संगठन की मौजूदा शक्तियों और जिम्मेदारियों को भी पूरी तरह बनाए रखना चाहती है।
जनता के प्रमुख मुद्दों और स्थानीय राजनीतिक माहौल की भी ली जाएगी जानकारी
प्रभारियों की यह भी जिम्मेदारी होगी कि वे अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्र में जनता से जुड़े प्रमुख मुद्दों और वहां की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को बारीकी से समझें। उन्हें यह पता लगाना होगा कि वर्तमान सरकार को लेकर आम नागरिकों के मन में क्या धारणा है, युवाओं और महिलाओं के सामने आज के समय में सबसे बड़े सवाल क्या हैं, और किसान तथा मजदूरों से जुड़े कौन से अहम मुद्दे उस क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रभावी हैं। इसके अलावा, विपक्षी दलों की हर गतिविधि पर भी पैनी नजर रखनी होगी। साथ ही, प्रदेश कांग्रेस की ओर से समय-समय पर घोषित किए जाने वाले आंदोलनों, जनसभाओं, पदयात्राओं और जनसंवाद कार्यक्रमों को बूथ स्तर तक सफलतापूर्वक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी भी इन्हीं विधानसभा प्रभारियों की होगी। पार्टी की यह स्पष्ट मंशा है कि प्रदेश स्तर के सभी कार्यक्रम स्थानीय इकाइयों और जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के साथ मैदानी स्तर पर पूरी तरह दिखाई दें।
30 दिन की अवधि पूरी होने के बाद प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
निर्धारित एक महीने की यह अवधि पूरी होने के बाद सभी प्रभारियों को पांच प्रमुख बिंदुओं के आधार पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके देनी होगी। इन मुख्य बिंदुओं में विधानसभा क्षेत्र में संगठन की वर्तमान जमीनी स्थिति, इन 30 दिनों के दौरान किए गए कुल कार्य, क्षेत्र में सामने आई प्रमुख समस्याएं, प्रदेश नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग और संगठन को आगे बढ़ाने के लिए दिए गए उपयोगी सुझाव शामिल होंगे। इस संपूर्ण रिपोर्ट के आधार पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व यह भली-भांति समझ सकेगा कि किन-किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को और अधिक सक्रिय करने की जरूरत है तथा किन विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए जिला या प्रदेश स्तर पर त्वरित कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

