Hemant Soren Land Scam रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रांची की विशेष PMLA अदालत में गुरुवार को आरोप तय करने की प्रक्रिया पर सुनवाई शुरू हो गई. हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए. मामला रांची के बड़गाईं इलाके की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसको लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के जरिए जमीन हासिल करने तथा उसे अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है.
Hemant Soren Land Scam:8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा मामला
ED के अनुसार, बड़गाईं/बड़ियातू इलाके की विवादित जमीन की खरीद, कब्जे और रिकॉर्ड में हेरफेर के पीछे एक संगठित प्रक्रिया का आरोप है. जांच एजेंसी का दावा है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर जालसाजी की गई और सरकारी रिकॉर्ड का दुरुपयोग करते हुए जमीन पर अधिकार स्थापित करने की कोशिश हुई.
ED ने अप्रैल 2024 में हेमंत सोरेन समेत पांच लोगों के खिलाफ PMLA के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. एजेंसी के मुताबिक, विवादित जमीन करीब 8.8 एकड़ है और उस समय इसकी अनुमानित कीमत करीब 31 करोड़ रुपये बताई गई थी. ED ने इस संपत्ति को भी अस्थायी रूप से अटैच किया था.
ED का आरोप क्या है?
ED की जांच के मुताबिक, तत्कालीन राजस्व अधिकारी भानु प्रताप प्रसाद पर सरकारी जमीन से संबंधित मूल रिकॉर्ड की जिम्मेदारी का दुरुपयोग करने और जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी में मदद करने का आरोप है. एजेंसी ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल हेमंत सोरेन समेत अन्य लोगों के पक्ष में जमीन के अवैध अधिग्रहण या कब्जे में सहायता देने के लिए किया गया.
एजेंसी का मामला सिर्फ जमीन के स्वामित्व के विवाद तक सीमित नहीं है. ED ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि जमीन अपराध से अर्जित संपत्ति यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ के रूप में मामले का हिस्सा बनी.
हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं. आरोप तय होने की प्रक्रिया में अदालत यह देखती है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथमदृष्टया आधार मौजूद है या नहीं.
पहले भी खारिज हो चुकी है डिस्चार्ज याचिका
इस मामले में हेमंत सोरेन की ओर से अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल की गई थी. जून 2026 में रांची की विशेष PMLA अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया था.
18 सितंबर को झारखंड हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग स्वीकार नहीं की. इससे बड़गाईं जमीन मामले में विशेष PMLA अदालत में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ.
21 सितंबर को तकनीकी समस्या के कारण नहीं हो सकी थी सुनवाई
आरोप तय करने की प्रक्रिया पर पहले 21 सितंबर को सुनवाई होनी थी. उस दिन हेमंत सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होना था, लेकिन सर्वर/तकनीकी समस्या के कारण उनकी वर्चुअल पेशी नहीं हो सकी. इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की थी.
इससे पहले सोरेन की ओर से सुनवाई टालने का अनुरोध भी किया गया था. ED ने इसका विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी की कोशिश बताया था. अदालत ने उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उस दिन आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
मामले में पहले 14 आरोपियों पर आरोप तय
बड़गाईं जमीन से जुड़े व्यापक मामले में विशेष PMLA अदालत पहले ही कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है. सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं. इनमें पूर्व राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, अंतु तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, तपस घोष, शेखर कुशवाहा और मोहम्मद सद्दाम हुसैन समेत अन्य आरोपी शामिल हैं. हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया लंबित थी.
2024 में गिरफ्तार हुए थे हेमंत सोरेन
जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने हेमंत सोरेन से जांच के दौरान कई बार पूछताछ की थी. एजेंसी ने उन्हें 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वे जेल से बाहर आए। मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया इसके बाद भी जारी रही.
हेमंत सोरेन का क्या पक्ष है?
हेमंत सोरेन की ओर से मामले में आरोपों का विरोध किया गया है। उनकी दलील रही है कि ED के आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है. उन्होंने डिस्चार्ज की मांग करते हुए मामले में अपने खिलाफ उपलब्ध सामग्री पर सवाल उठाए थे.
वहीं ED का कहना है कि इस चरण में अदालत को पूरे मामले की विस्तृत सुनवाई या साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन नहीं करना है, बल्कि यह देखना है कि उपलब्ध सामग्री प्रथमदृष्टया मुकदमा चलाने का आधार बनाती है या नहीं.
अब आगे क्या होगा?
24 सितंबर की सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि हेमंत सोरेन के खिलाफ PMLA मामले में औपचारिक आरोप तय किए जाएं या नहीं. यदि अदालत आरोप तय करती है तो मामला आगे नियमित ट्रायल की दिशा में बढ़ेगा, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें पेश करेंगे.
फिलहाल अदालत की प्रक्रिया जारी है और हेमंत सोरेन के खिलाफ लगे आरोपों को अदालत द्वारा दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता. मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

