अभिजीत दीपके समेत CJP के 4 नेताओं को HC से मिला नोटिस,महिला के साथ पीएम मोदी की फेक तस्वीर का मामला

Abhijeet Deepke:दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की कथित अश्लील डीपफेक तस्वीर बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के चार नेताओं को नोटिस जारी किया है. अदालत ने मेटा को कथित आपत्तिजनक तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाने का निर्देश भी दिया है. मामले में पीड़ित महिला ने अपनी सुरक्षा और तस्वीरों को इंटरनेट से हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी.

मामले में जिन चार नेताओं को नोटिस जारी किया गया है, उनमें अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह शामिल हैं. याचिका में इन नेताओं पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने महिला की निजी तस्वीर का इस्तेमाल कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक आपत्तिजनक तस्वीर तैयार की और उसे प्रसारित किया. हालांकि, ये आरोप हैं और अदालत में अभी इनकी पुष्टि नहीं हुई है.

महिला ने अदालत से कथित डीपफेक तस्वीरों और उनसे जुड़े लिंक को सोशल मीडिया समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की है. याचिका में मेटा और संबंधित अधिकारियों से तस्वीरों को हटाने तथा उनके प्रसार पर रोक लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया है.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तस्वीर के इस्तेमाल का आरोप

याचिका के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर महिला की निजी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि उसकी अनुमति के बिना तस्वीर हासिल की गई और AI आधारित फेस-स्वैपिंग टूल के जरिए चेहरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक आपत्तिजनक तस्वीर में जोड़ दिया गया.

महिला का दावा है कि कथित रूप से मॉर्फ की गई तस्वीर को बैनर और पोस्टर पर प्रदर्शित किया गया. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान तस्वीर वाले बैनर दिखाए गए और बाद में उनसे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए.

महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की थी. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है.

याचिका में कहा गया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद कथित तौर पर तस्वीरों को हटाने और उन्हें प्रसारित करने वालों की पहचान करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए. इसी आधार पर महिला ने हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कथित तस्वीरों के प्रसार के बाद उसे गंभीर मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उसने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और जान से मारने की धमकी मिलने का दावा किया. महिला ने दिल्ली पुलिस को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने, कथित तस्वीरों के ऑनलाइन लिंक की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की है.

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने अदालत को बताया कि इस घटना के संबंध में FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की जरूरत है.

इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दी. याचिका में मेटा सहित संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कथित डीपफेक तस्वीरों को हटाने और उनके प्रसार को रोकने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

डीपफेक ऐसी तस्वीर, वीडियो या ऑडियो सामग्री को कहा जाता है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इस तरह तैयार या बदला जाता है कि वह वास्तविक दिखाई दे सकती है. फेस-स्वैपिंग तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा दूसरी तस्वीर या वीडियो में जोड़ा जा सकता है.

इस मामले में महिला का आरोप है कि उसकी तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना किया गया. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह निजता, डिजिटल पहचान और ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है.

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है.अदालत में याचिका पर आगे की सुनवाई में तस्वीरों को हटाने, महिला की सुरक्षा और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा.

Latest news

Related news