उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर,CM धामी बोले-स्थानीय उत्पादों और युवाओं को देंगे बढ़ावा

Uttarakhand’s Development Model : उत्तराखंड में विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ हिमालयी पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी सरकार के सामने है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी में दैनिक जागरण के ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड: आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम में राज्य के विकास, रोजगार, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं रखीं. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विकास योजनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है. इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है. साथ ही ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तथा सर्वेक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

कार्यक्रम में सीएम धामी ने राज्य की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए बजट, पर्यटन, होम-स्टे, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उत्पादों को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी.

Uttarakhand’s Development Model:1.11 लाख करोड़ पहुंचा बजट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय प्रदेश का बजट करीब 4 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है. उनके मुताबिक, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी जैसे क्षेत्रों में राज्य ने प्रगति की है.

उन्होंने कहा कि विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. समय के साथ जरूरतें और चुनौतियां भी बदलती हैं, इसलिए राज्य को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करनी होंगी.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए. बड़ी परियोजनाओं के साथ आम लोगों की जरूरतों को पूरा करना भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

पर्यटन और होम-स्टे से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन और फिल्म शूटिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है.राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि होने का दावा भी उन्होंने किया.

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.उन्होंने एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे.

पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि होम-स्टे जैसी व्यवस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ा सकती हैं.इससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं.

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से स्थानीय उत्पादों को मिलेगी पहचान

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं सीमित संसाधनों में भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 5 लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है. महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वे स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें.

मुख्यमंत्री के मुताबिक, स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने से महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ प्रदेश की पारंपरिक पहचान को भी मजबूती मिल सकती है.

युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ स्वरोजगार के अवसर

रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था के तहत सरकारी सेवाओं में अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए लागू किए गए नकल विरोधी कानून का जिक्र किया.

सीएम धामी ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं. भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं में शामिल 100 से अधिक लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई किए जाने की बात भी उन्होंने कही.

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. सरकार उन्हें स्टार्टअप, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना है.

उनके अनुसार, प्रत्येक बच्चे को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है. शिक्षा को रोजगार और बदलती जरूरतों से जोड़कर युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं.

कुंभ-2027 की तैयारियों पर भी रखी बात

हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेला-2027 की तैयारियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और आयोजन सुरक्षित तथा सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो. कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए व्यवस्थाओं की तैयारी राज्य के पर्यटन और प्रशासनिक प्रबंधन से भी जुड़ी है.

हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता का होगा वैज्ञानिक आकलन

मुख्यमंत्री ने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को उत्तराखंड के सामने बड़ी चुनौतियां बताया. उन्होंने कहा कि राज्य में इकोलॉजी और इकॉनमी को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ना होगा.

धामी के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है. ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी तथा सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है.

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क, भवन, पर्यटन और शहरी विस्तार से जुड़ी योजनाओं के लिए प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है. दैनिक जागरण के आयोजन से पहले प्रकाशित रिपोर्टों में भी नियोजित विकास, पर्यावरण, रोजगार और पर्यटन को राज्य की प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया गया था.

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड: आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा और प्रताप बिष्ट सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए.

कार्यक्रम में हल्द्वानी-काठगोदाम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, काशीपुर के महापौर दीपक बाली, दैनिक जागरण के संपादक विजय सिंह यादव, कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी और राज्य संपादक मनोज झा भी मौजूद रहे. इसके अलावा कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, आईजी निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी.सी. सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

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