BRICS Summit 2026 नई दिल्ली : BRICS Summit 2026 में शामिल होने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. भारत आने से पहले उन्होंने BRICS की भूमिका, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने BRICS को एकतरफा रवैये का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग बढ़ाने का प्रभावी मंच बताया.
पेजेशकियान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की भूमिका को लेकर BRICS देशों के बीच वैकल्पिक व्यवस्था पर चर्चा लगातार बढ़ रही है.
BRICS Summit 2026 :‘एकतरफा रवैये का मुकाबला करना BRICS का मकसद’
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS का मुख्य उद्देश्य देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंध विकसित करने का अवसर देना है. उनके मुताबिक, समूह की कोशिश एकतरफा रवैये का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की है.
उन्होंने कहा कि इस साल के BRICS शिखर सम्मेलन का फोकस एकजुटता, स्थिरता, प्रतिरोध और नवाचार जैसे विषयों पर है. उनके अनुसार, सदस्य देशों के पास आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं.
डॉलर पर निर्भरता घटाने की वकालत
BRICS के आर्थिक एजेंडे पर बात करते हुए पेजेशकियान ने सदस्य देशों के बीच संयुक्त निवेश और आर्थिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए BRICS बैंक की भूमिका का उल्लेख किया.
उन्होंने आर्थिक लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया. उनका कहना था कि देशों को डॉलर पर अत्यधिक निर्भर हुए बिना अपने आर्थिक और क्षेत्रीय विकास को आगे बढ़ाने के रास्ते तलाशने चाहिए.
ईरानी राष्ट्रपति ने बड़ी शक्तियों की ओर से लिए जाने वाले एकतरफा फैसलों और अत्यधिक मांगों के विरोध की भी बात कही. उनके बयान को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में वैकल्पिक तंत्र विकसित करने की BRICS की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है.
BRICS में दुनिया की बड़ी आबादी शामिल
पेजेशकियान ने BRICS के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन के सदस्य देशों में दुनिया की 45 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है और इन देशों के पास दुनिया के करीब 35 प्रतिशत भू-भाग का हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि समूह के सदस्य देशों में कई क्षेत्रों में बड़ी क्षमताएं मौजूद हैं. ऐसे में आपसी सहयोग बढ़ाकर BRICS अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है.
भारत के साथ पुराने रिश्तों का किया जिक्र
भारत रवाना होने से पहले पेजेशकियान ने भारत और ईरान के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया. उन्होंने दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को रेखांकित किया.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में भारत और ईरान के बीच सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं. BRICS सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, ब्राजील और अन्य क्षेत्रीय देशों के नेताओं की मौजूदगी को उन्होंने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया.
वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत: पेजेशकियान
जब पेजेशकियान से पूछा गया कि एकतरफा रवैये के खिलाफ BRICS कितना प्रभावी साबित हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस समूह का गठन किया गया था.
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बेहद जटिल है और पिछले कुछ वर्षों में कुछ शक्तियों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अपना प्रभाव बढ़ाया है. ऐसे हालात में इससे निपटने के लिए नए तरीकों की आवश्यकता है.
पेजेशकियान के मुताबिक, BRICS देशों के बीच नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने से संगठन को मजबूत किया जा सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एकतरफा रवैये को कम करने में मदद मिल सकती है.
BRICS Summit 2026 पर दुनिया की नजर
ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब BRICS की भूमिका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है. सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, वित्तीय सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है.
पेजेशकियान के भारत पहुंचने के साथ ही ईरान की ओर से BRICS के जरिए आर्थिक सहयोग बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है.

