बंगलूरू| कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को शुरुआती दो छंदों तक सीमित करने के निर्णय पर शुरू हुए विवाद के बीच राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है। शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान राष्ट्रीय विभूतियों के ऐतिहासिक विचारों और दिशानिर्देशों के बिल्कुल अनुरूप है।
'हमें भाजपा और आरएसएस से देशभक्ति सीखने की आवश्यकता नहीं': खरगे का तंज
भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जा रही आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी को भाजपा या आरएसएस से देशभक्ति का पाठ पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं के मार्ग पर चलने में क्या अनुचित है? उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला उन महापुरुषों की सोच पर आधारित है जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
कर्नाटक सरकार का नया आदेश और 1937 के प्रस्ताव का संदर्भ
राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, अब कर्नाटक के सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के केवल प्रथम दो पद ही गाए जाएंगे। हालांकि, जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल उपस्थित रहेंगे, वहां यह नियम लागू नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि 1937 में कांग्रेस कार्य समिति ने राष्ट्रगीत के शुरुआती दो छंदों को ही पार्टी आयोजनों में गाने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसका पालन करने का निर्णय लिया गया है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री पर ईडी की कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को राजनीतिक से प्रेरित करार देते हुए खरगे ने केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि विगत वर्षों में दर्जनों छापों के बावजूद दोषसिद्धि की दर अत्यंत नगण्य रही है। इसके साथ ही कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) मामले में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने भाजपा नेताओं को कोई भी निराधार दावा करने से पहले ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने की चुनौती दी।

