चीन ने किया ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोप से इनकार, दी टैरिफ बढ़ाने के खिलाफ US को चेतावनी

चीन China ने बुधवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि देश ईरान को मिलिट्री मदद दे रहा है. यह जवाब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच आया है.

मनगढ़ंत है ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने का आरोप- चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “मीडिया रिपोर्ट्स में चीन पर ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने का आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत है.”

यह बयान फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया था कि ईरान ने मिडिल ईस्ट में US मिलिट्री बेस को टारगेट करने के लिए जानकारी एक चीनी सैटेलाइट (TEE-01B) हासिल की है. चीन का बयान रिपोर्ट पब्लिश होने के कुछ ही घंटों के अंदर आया, जिसमें मिलिट्री सपोर्ट में शामिल होने के किसी भी सुझाव को खारिज कर दिया गया.
हालांकि, चीन के बयान में सीधे तौर पर इस रिपोर्ट या किसी दूसरी रिपोर्ट का ज़िक्र नहीं किया गया.

US के संभावित टैरिफ बढ़ाने के खिलाफ दी चेतावनी

ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के इनकार के साथ-साथ, बीजिंग ने अमेरिका को इन आरोपों के आधार पर आर्थिक कार्रवाई करने के खिलाफ भी चेतावनी दी.
लिन जियान ने कहा, “अगर US इन आरोपों के आधार पर चीन पर टैरिफ बढ़ाता है, तो चीन भी जवाबी कार्रवाई करेगा.”
चीन ने ये बयान तब दिया जब US ने संकेत दिया कि वह उन देशों पर टैरिफ बढ़ा सकता है, जिनके बारे में उसका मानना है कि वे इस इलाके में चल रहे संघर्ष में ईरान का साथ दे रहे हैं.

ट्रंप ने China को 50% टैरिफ बढ़ाने की दी धमकी

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद ईरान के खिलाफ अपनी धमकियों का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया — और सीधे चीन पर भी हमला बोला. वह उन रिपोर्ट्स पर जवाब दे रहे थे जिनमें कहा गया था कि US इंटेलिजेंस ने पाया है कि चीन पिछले बुधवार से शुरू हुए दो हफ्ते के नाजुक सीजफायर के बीच ईरान को हथियारों की खेप भेजने की तैयारी कर रहा है.
ट्रंप, जो अगले महीने चीन जाने वाले हैं, ने फॉक्स न्यूज़ को कहा, “मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे… लेकिन अगर हम उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लेते हैं, तो उन्हें 50% टैरिफ देना होगा, जो बहुत ज़्यादा है.”
उन्होंने यह धमकी ऐसे सभी देशों को दी है, लेकिन खासकर चीन को, क्योंकि वह शनिवार की CNN रिपोर्ट के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे. उस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन अगले कुछ हफ़्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है. इसमें तीन अनजान सोर्स का ज़िक्र किया गया था जो “हाल के US इंटेलिजेंस असेसमेंट से परिचित हैं”.
इस पर जवाब देते हुए, ट्रंप ने चीन को कच्चा तेल बेचने का भी ऑफ़र दिया, यूएस से और वेनेज़ुएला से भी, आपको याद दिला दें कि, वेनेज़ुएला पर US इस साल की शुरुआत में उसके प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को “गिरफ्तार” करने या असल में अगवा करने के बाद लगभग राज कर रहा है.

रूस से अलग चीन अब तक न्यूट्रल होने का दावा करता रहा है

US बैन के बावजूद, चीनी कंपनियों ने ईरान को ऐसी टेक्नोलॉजी बेचना जारी रखा है जिससे वह हथियार बना सके. लेकिन CNN ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चीनी सरकार का सीधे हथियार ट्रांसफर करना एक नए लेवल की मदद होगी.
खबर है कि बीजिंग खुद को ईरान का पक्का दोस्त बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसके तेल पर वह बहुत ज़्यादा निर्भर है, जबकि वह बाहर से न्यूट्रल रहता है.
सूत्रों ने CNN को बताया कि चीनी यह भी कह सकते हैं कि एयर डिफेंस सिस्टम अटैकिंग के बजाय डिफेंसिव होते हैं.
यह ईरान के लिए उनके सपोर्ट को रूस के सपोर्ट से अलग करेगा. व्लादिमीर पुतिन का शासन ईरान को इंटेलिजेंस दे रहा है जिससे उसे मिडिल ईस्ट/वेस्ट एशिया में US बेस और एसेट्स को पहले से टारगेट करने में मदद मिली है.
ईरान यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को शाहेड ड्रोन देकर मदद कर रहा है, और चीन को अपना ज़्यादातर बैन किया हुआ तेल भी बेचता है.

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