Pawan Khera Case नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए पवन खेड़ा को नोटिस जारी किया है और तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है.
Pawan Khera Case : क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा से जुड़ा हुआ है. अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में असम विधानसभा चुनाव के दौरान पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान उन्होंने रिनिकी सरमा पर आरोप लगाया था कि उनके पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा जैसे तीन देशों के पासपोर्ट हैं. साथ ही दुबई और अमेरिका में अघोषित संपत्ति होने का दावा भी किया गया था. इन आरोपों के बाद रिनिकी सरमा ने इसे मानहानिकारक बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई थी.
सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेलंगाना हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दलील दी कि जब अपराध और एफआईआर असम में दर्ज हुई है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत कैसे दे दी? मेहता ने कहा कि केवल हैदराबाद में कुछ संपत्ति होने के आधार पर वहां याचिका दाखिल करना कानून का दुरुपयोग है. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या कल को कोई नागालैंड में घर किराए पर लेकर वहां से जमानत की अर्जी लगा देगा? कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए माना कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने क्षेत्राधिकार से संबंधित पुराने फैसलों की अनदेखी की है.
तेलंगाना हाईकोर्ट का वो आदेश जिस पर लगी रोक..
बता दें कि 10 अप्रैल 2026 को तेलंगाना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी. इस राहत के पीछे खेड़ा ने हैदराबाद में अपनी पत्नी की संपत्ति और वहां आने-जाने का हवाला दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यदि पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत चाहिए, तो उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट या संबंधित निचली अदालत का रुख करना चाहिए न कि किसी अन्य राज्य के हाईकोर्ट का.
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी सुरक्षा अब खत्म हो गई है. कानूनी जानकारों का मानना है कि अब असम पुलिस के पास खेड़ा को गिरफ्तार करने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि, मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होनी है, तब तक खेड़ा को असम की अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा.
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस अदालती फैसले के बाद असम और दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि कानून अपना काम करेगा. वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इस पूरी कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है. पार्टी का कहना है कि चुनावी समय में जानबूझकर मुख्य प्रवक्ता को निशाना बनाया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके.

