नेपाल त्रासदी की खौफनाक तस्वीर, पुल टूटे तो कई इलाकों का संपर्क कटा

काठमांडू| नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण देश के कई हिस्सों का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और रास्तों को पुनः शुरू करने के लिए नेपाली प्रशासन भारत और चीन से आपातकालीन बेली पुल (अस्थायी पुल) की मदद मांग रहा है।

अब तक 1,300 से अधिक मौतें, हजारों लोग अब भी लापता

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 1,356 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 4,994 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमों द्वारा अब तक 13,396 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपालतिब्बत सीमा के समीप हिमस्खलन और चट्टानें खिसकने से भोटेकोशी नदी में आए उफान ने कई पनबिजली परियोजनाओं, सड़कों और दर्जनों मकानों को तबाह कर दिया है।

भारत और चीन से मांगी मदद, मुस्तांग में पहुंचे बेली ब्रिज

आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत और चीन दोनों पड़ोसी देशों से अस्थायी पुलों की आपूर्ति का अनुरोध किया है। चीन की ओर से मुस्तांग के कोराला बॉर्डर के लिए 100-मीटर क्षमता वाले दो बेली ब्रिज भेज दिए गए हैं। वहीं भारत ने भी आवश्यकतानुसार बेली पुल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

सड़क और बुनियादी ढांचे को 50 अरब रुपये का नुकसान

सड़क विभाग के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, केवल सड़कों और पुलों को ही लगभग 30 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि इनके पूर्ण पुनर्निर्माण में करीब 50 अरब नेपाली रुपये का खर्च आने की संभावना है। बाढ़ के उफान में रसुवा और चितवन के बीच 41 प्रमुख पुल पूरी तरह बह गए हैं, जिससे परिवहन और माल ढुलाई व्यवस्था ठप्प हो गई है। धाडिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच का संपर्क भी कंक्रीट का पुल ढहने से टूट गया है।

क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण पुलों को पहुंचाना बना बड़ी चुनौती

भौतिक बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सेना और आपदा प्रबंधन बल नेपाली सेना की मदद से नुवाकोट के देवीघाट में एक्रो (Acrow) ब्रिज स्थापित कर रहे हैं। यद्यपि विभाग के पास कुछ बेली पुल उपलब्ध हैं, लेकिन कई स्थानों तक पहुंचने वाली सड़कें ही बह जाने के कारण भारी उपकरणों को आपदा स्थल तक ले जाना अत्यंत कठिन चुनौती बना हुआ है।

शवों की पहचान में आ रही मुश्किलें, तिब्बत में भी भारी तबाही

बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के बीच बाढ़ में बहकर आए शवों की शिनाख्त करना प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। NDRRMA के अनुसार, अब तक केवल 98 शवों की पहचान हो सकी है। वहीं सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में भी इस प्राकृतिक आपदा से 40 से अधिक लोगों की जान जाने और 500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है।

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