Ranchi Ration Card Scam रांची : झारखंड की राजधानी रांची में जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले सरकारी राशन का लाभ लेने में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. जिले में 6 लाख से अधिक सालाना आय वाले 6556 परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ उठाते पाए गए हैं.
आय के सरकारी आंकड़ों के सत्यापन में यह बात साफ हुई है कि इन परिवारों की वार्षिक आय तय सीमा से अधिक होने के बावजूद ये वर्ष 2015 से लगातार मुफ्त और रियायती सरकारी अनाज उठा रहे थे. मामला सामने आने के बाद जिला आपूर्ति विभाग ने इन अपात्र कार्डधारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और ली गई सब्सिडी की पूरी राशि वसूलने की कार्रवाई शुरू कर दी है.
Ranchi Ration Card Scam:CBDT से खुला फर्जीवाड़े का राज
जिला आपूर्ति कार्यालय के अनुसार, भारत सरकार से प्राप्त सूची और परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) डेटा के सत्यापन के दौरान इस गड़बड़ी का पता चला. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के आय समूह डेटा की जांच में पाया गया कि रांची जिले के 6,556 परिवारों के सदस्यों की सालाना आय 6 लाख रुपये से अधिक है. इसके बावजूद ये परिवार राशन कार्ड के जरिए अनाज ले रहे थे, जो कि जन वितरण प्रणाली के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.
2015 से ले रहे थे मुफ्त खाद्यान्न
विभागीय जानकारी के मुताबिक, ये परिवार पात्र न होने के बावजूद पिछले नौ वर्षों (वर्ष 2015) से लगातार सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे. जिला आपूर्ति शाखा की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि गलत या भ्रामक जानकारी देकर अथवा पात्रता न होने के बावजूद राशन का लाभ लेना ‘झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2024 की धारा-7’ का सीधा उल्लंघन है.
15 दिनों का अल्टीमेटम: न देने पर दर्ज होगी FIR
जिला आपूर्ति शाखा ने सभी चिन्हित 6,556 परिवार के मुखिया को आधिकारिक नोटिस जारी किया है. नोटिस में निर्देश दिया गया है कि:
15 दिनों के भीतर उठाए गए राशन की राशि जमा की जाए और अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाए.
अब तक उठाए गए संपूर्ण राशन की वसूली वर्तमान बाजार दर (Market Rate) पर की जाएगी.
वसूली की जाने वाली कुल राशि पर 12% सालाना ब्याज भी वसूला जा सकता है.
विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित 15 दिनों के अंदर राशि जमा नहीं कराई जाती है या संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सीधी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

