Adani-Hindenburg Case: सुप्रीम कोर्ट का सेबी को निर्देश, 2 महीने में अडानी मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करे

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंदेनबर्ग मामले में एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है. 6 सदस्यों की एक्सपर्ट कमिटी के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे प्रमुख होंगे. इस कमेटी में बैंकर केवी कामथ और ओपी भट के अलावा इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकानी, सोमसेकरन सुंदरम, जस्टिस जेपी देवधर शामिल हैं.

नंदन नीलेकानी के नाम पर हो सकता है बवाल

एक्सपर्ट कमिटी के एक सदस्य इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नाम पर बीजेपी को आपत्ति हो सकती है. नंदन नीलकेणि के सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ अच्छे रिश्ते जग ज़ाहिर है. वो 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुकें हैं. इसके अलावा यूपीए के दौर में नंदन की आधार कार्ड, यूपीआई, फास्टैग, जीएसटी जैसी तकनीकों को देश में लाने में अहम भूमिका रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को 2 महीने में जांच पूरी करने को कहा

इस मामले में चार याचिकाएं दायर की गई थी. वकील एमएल शर्मा, विशाल तिवारी, कांग्रेस नेता जया ठाकुर और मुकेश कुमार की दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया.

सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंदेनबर्ग मामले में सेबी जांच को अपनी जांच 2 महीने में पूरी कर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश  दिए है. कोट ने सेबी से कहा है कि वो इस मामले में संभावित हेरफेर/स्टॉक के उल्लंघन को लेकर जांच करे.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को विपक्ष ने बताया अपनी जीत

संसद के बजट सत्र की शुरुआत से विपक्ष लगातार अडानी को लेकर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर जेपीसी की मांग पर अड़ा था लेकिन सरकार की तऱफ से कोई आश्वासन ना मिलने पर पूरे सत्र के दौरान हंगामा होता रहा. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष का कहना है कि ये उनकी जीत है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश मोदी सरकार के कामकाज पर करारा प्रहार है

 

 

 

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