संसद के बाहर बढ़ा तनाव, विजय चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में टकराव

नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ियों और देश में बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब अत्यधिक उग्र रूप धारण कर चुका है। संसद के मानसून सत्र के दौरान आयोजित इस विशाल संसद मार्च के बीच अनशन पर बैठे अभिजीत दिपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दावा किया है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा आंदोलनकारियों से वार्ता करने पर सहमत हो गए हैं। देश के कोने-कोने से आए हजारों प्रतियोगी परीक्षार्थियों, छात्रों और उनके अभिभावकों का जंतर-मंतर पर भारी जमावड़ा लगा हुआ है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक और सुरक्षा अमला पूरी तरह अलर्ट पर आ गया है।

जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली में थ्री-टियर सुरक्षा व्यवस्था लागू

संसद सत्र के दौरान प्रदर्शन की भयावहता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सख्त कर दिया है। जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में थ्री-टियर सुरक्षा ग्रिड तैनात किया गया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की मजबूत परतें शामिल हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत बिना पूर्व अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने या धरना देने पर पूर्ण प्रतिबंध है, और उल्लंघन करने वालों पर बीएनएस की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

संसद के करीब रेल भवन तक पहुंचे प्रदर्शनकारी और पुलिस से झड़प

सोमवार को आंदोलनकारी सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संसद भवन के बेहद समीप स्थित रेल भवन और विजय चौक तक पहुँच गए, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। आमतौर पर रायसीना रोड तक सीमित रहने वाले प्रदर्शनकारियों के मुख्य प्रवेश द्वार के इतने निकट पहुँचने के बाद संसद के दो प्रमुख द्वारों को एहतियातन बंद कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ की एंटी-रायट टीमों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लगातार लाउडस्पीकर से हटने की अपील करनी पड़ी। भारी मशक्कत और झड़प के बाद पुलिस ने विजय चौक और आसपास के इलाकों से प्रदर्शनकारियों को खदेड़कर संसद परिसर को किले में तब्दील कर दिया।

सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें और अभ्यर्थियों का आक्रोश

आंदोलनकारी संगठन ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगे रखी हैं, जिन्हें लेकर वे लंबे समय से मुखर हैं। इसमें पहली मांग नीट और अन्य राष्ट्रीय भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली तथा पेपर लीक प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय करना है। दूसरी मांग के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जोर दिया जा रहा है, जबकि तीसरी मुख्य मांग देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी, सरकारी नियुक्तियों में होने वाले लंबे विलंब और छात्रों के अनिश्चित भविष्य पर सरकार से सीधा जवाब मांगना है।

अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने लिखा संसद मार्च में शामिल होने का पत्र

दूसरी ओर, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल निदेशक को पत्र लिखकर संसद मार्च 'संसद चलो' में शामिल होने के लिए अस्थायी अनुमति मांगी है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वे पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य हैं, ऐसे में जब वे किसी हिरासत में नहीं हैं तो उन पर पाबंदियां नहीं लगाई जानी चाहिए। हालांकि, सफदरजंग और एम्स के विशेषज्ञों की संयुक्त चिकित्सा टीम का कहना है कि उपवास के कारण उनकी रक्त रिपोर्ट में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, जिसके चलते उन्हें निरंतर चिकित्सकीय देखरेख में रखना अनिवार्य है।

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