गृहमंत्री अमित शाह के UCC लागू करने के ऐलान को ओवैसी की चुनौती,बोले-हिम्मत है तो गोवा में लागू करके दिखाइए

UCC Amit Shah : यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शाह के बयान पर सवाल उठाते हुए गोवा में UCC लागू करने की चुनौती दी है.

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के NDA शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने के ऐलान के बाद AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर केंद्र सरकार और बीजेपी मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है.

UCC Amit Shah:ओवैसी ने गोवा में UCC लागू करने की दी चुनौती

असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह, बीजेपी और RSS को गोवा में UCC लागू करके दिखाने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि गोवा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और यदि सरकार वास्तव में समान नागरिक संहिता को लेकर गंभीर है तो उसे वहां भी इसे लागू करके दिखाना चाहिए।

ओवैसी ने कहा कि अमित शाह को गोवा में खड़े होकर यह घोषणा करनी चाहिए कि वहां भी वही UCC कानून लागू किया जाएगा, जो उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों में लागू किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार वास्तव में गोवा में भी समान नागरिक संहिता लागू करेगी।

AIMIM प्रमुख ने दावा किया कि ऐसा नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसी के साथ UCC को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए।

‘UCC समानता के लिए नहीं, मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए’

ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समानता के उद्देश्य से UCC नहीं ला रही है. उनके मुताबिक, सरकार की ओर से जिन राज्यों में UCC को लेकर कदम उठाए गए हैं, उनका असर विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय पर पड़ने वाला है.

उन्होंने कहा कि देश में करीब 18 करोड़ मुसलमान हैं और UCC के जरिए उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, ये ओवैसी के राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से UCC को लेकर अलग तर्क दिए जाते रहे हैं.

संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला

हैदराबाद सांसद ने UCC को संविधान के कई प्रावधानों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि UCC लागू करने की कोशिश संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकती है.

अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है. अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों के धार्मिक मामलों के प्रबंधन के अधिकार और अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक एवं भाषाई हितों की सुरक्षा से जुड़ा है.

ओवैसी का तर्क है कि व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाने की कोशिश धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के सवाल खड़े करती है.

‘गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश’

ओवैसी ने अमित शाह, बीजेपी और RSS पर गैर-हिंदू समुदायों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने भारत की विविधता और बहुलतावादी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की पहचान अनेकतावाद से जुड़ी है.

उन्होंने अपने बयान में लॉ कमीशन का भी हवाला दिया और कहा कि केंद्र की ओर से गठित लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में UCC को भारत के लिए जरूरी और वांछनीय नहीं माना था.

हालांकि, UCC पर लॉ कमीशन की विभिन्न प्रक्रियाओं और रिपोर्टों को लेकर राजनीतिक दलों की व्याख्या अलग-अलग रही है. इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित रिपोर्ट और उसके संदर्भ को देखना जरूरी है.

अमित शाह ने क्या कहा था?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 13 सितंबर को UCC को लेकर बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा.

शाह के मुताबिक, UCC को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है और अब NDA शासित अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

गृह मंत्री ने भरोसा जताया कि 2029 से पहले NDA शासित सभी राज्यों में UCC लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.

UCC पर फिर आमने-सामने बीजेपी और विपक्ष

अमित शाह के इस ऐलान के बाद UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है. बीजेपी इसे समान नागरिक कानून और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था से जोड़ती रही है, जबकि ओवैसी समेत कई विपक्षी नेता इसे धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप के तौर पर देखते हैं.

आने वाले समय में NDA शासित राज्यों में UCC को लेकर सरकारों के कदम और इस पर विपक्ष की प्रतिक्रिया इस बहस को और तेज कर सकती है. खास तौर पर गोवा को लेकर ओवैसी की चुनौती ने इस राजनीतिक विवाद को नया मुद्दा दे दिया है.

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