BRICS बैठक की सफलता पर कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार को दी बधाई, बोले-‘बड़ी उपलब्धि है कि..

BRICS Kapil Sibal नई दिल्ली : दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन को लेकर वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ की है. सिब्बल ने BRICS के साझा घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इतने अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच बिना किसी बड़े विवाद के संयुक्त बयान जारी होना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि BRICS की बैठक में व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई और इसके बाद एक विस्तृत साझा बयान जारी किया गया. उनके मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सम्मेलन के दौरान कोई ऐसा विवाद सामने नहीं आया, जिससे समूह के भीतर कड़वाहट पैदा होती.

BRICS Kapil Sibal:बिना विवाद के संयुक्त बयान बड़ी कामयाबी’

कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत ऐसी स्थिति में था, जहां अगर सम्मेलन के दौरान किसी संवेदनशील मुद्दे पर मतभेद उभरता तो उसका असर पूरे BRICS समूह पर पड़ सकता था. ऐसे में सभी देशों को साथ लेकर चलना आसान नहीं था.

उन्होंने कहा कि बिना किसी विवाद के संयुक्त बयान पारित होना अपने आप में बड़ी कामयाबी है और इसके लिए सरकार को बधाई दी जानी चाहिए.

सिब्बल के मुताबिक BRICS में शामिल देशों के बीच कई ऐसे द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हैं, जिन पर सभी देशों की राय एक जैसी नहीं है. इसलिए किसी एक विवादित मुद्दे पर समूह की सर्वसम्मति बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

सीमा विवाद BRICS में उठाना आसान नहीं

सिब्बल ने BRICS के भीतर मौजूद जटिलताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सदस्य देशों के बीच सीमा विवादों को इस मंच पर उठाना उचित नहीं है, क्योंकि ऐसे विवाद मूल रूप से द्विपक्षीय मुद्दे होते हैं.

उन्होंने कहा कि BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर सभी देशों के हितों और रिश्तों को ध्यान में रखना पड़ता है. किसी एक देश के पक्ष या विपक्ष में प्रस्ताव पारित करने से समूह के भीतर मतभेद बढ़ सकते हैं.

अमेरिका, ईरान और इजरायल के रिश्तों का दिया उदाहरण

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि BRICS देशों के अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अलग-अलग तरह के संबंध हैं. उन्होंने मिस्र, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने वाला प्रस्ताव सभी सदस्य देशों के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता.

उन्होंने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों का भी उल्लेख किया. साथ ही पश्चिम एशिया में मौजूद धार्मिक और क्षेत्रीय जटिलताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे माहौल में सभी देशों के बीच ठोस सहमति बनाना आसान नहीं है.

‘BRICS देशों का समूह काफी विविध’

कपिल सिब्बल ने BRICS को अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों वाले देशों का समूह बताया. उनके अनुसार, सदस्य देशों के हित कई मामलों में एक-दूसरे से अलग हैं. ऐसे में BRICS से किसी क्रांतिकारी या बेहद ठोस साझा प्रस्ताव की उम्मीद करना आसान नहीं है.

उन्होंने कहा कि यही वजह है कि बिना किसी विवाद के संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनना महत्वपूर्ण है. सिब्बल ने इसे सरकार के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि बताया.

BRICS की शुरुआत चार देशों से हुई थी

कपिल सिब्बल ने BRICS के इतिहास का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि BRICS की शुरुआत 2006 में ब्राजील, भारत, रूस और चीन के साथ हुई थी। बाद में 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा.

समय के साथ BRICS का विस्तार हुआ और इसमें अन्य देशों को शामिल किया गया. सिब्बल ने कहा कि आज यह समूह पहले की तुलना में काफी बड़ा और विविध हो चुका है.

UPA सरकार और न्यू डेवलपमेंट बैंक का भी किया जिक्र

कपिल सिब्बल ने कहा कि BRICS के शुरुआती दौर में भारत की तत्कालीन UPA सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. उन्होंने 2012 की BRICS बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था.

सिब्बल ने मनमोहन सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि BRICS के संस्थागत विकास में उस दौर के प्रयासों को भी याद किया जाना चाहिए.

इस तरह कपिल सिब्बल का बयान BRICS सम्मेलन को लेकर राजनीतिक बहस के बीच एक अलग तस्वीर पेश करता है. उन्होंने सरकार की आलोचना के बजाय सम्मेलन में सहमति बनाने की कोशिश और साझा घोषणापत्र को महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया है.

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