ओडिशा के दो जिलों में बाढ़ का संकट कम, आंध्र प्रदेश में ₹4,764 करोड़ के नुकसान का आकलन

भुवनेश्वर। चक्रवात अर्नब के तांडव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मची थी, हालांकि अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने की ओर अग्रसर हैं। ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में बाढ़ के पानी में कमी आने से स्थिति सुधर रही है, फिर भी जलभराव वाले क्षेत्रों में लगभग 700 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश में चक्रवात के कारण 12 जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जहां राज्य सरकार के शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 4,764 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। व्यापक पैमाने पर फसलों, आवासीय मकानों और सड़क मार्गों को क्षति पहुंची है। इस बीच, स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार की सात सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम आंध्र प्रदेश पहुंच चुकी है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने युद्धस्तर पर राहत और बहाली कार्य संचालित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

ओडिशा में बाढ़ के घटते तेवर और राहत सामग्री का वितरण

ओडिशा के नौ दक्षिणी जिले चक्रवात से सर्वाधिक प्रभावित रहे, जिनमें गंजाम और गजपति में सबसे अधिक तबाही देखने को मिली। गंजाम में डेढ़ लाख से अधिक और गजपति में तीस हजार से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आए। प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। गंजाम के कलेक्टर वी. कीर्ति वासन के अनुसार, जिले के 56,051 नागरिकों को सुरक्षित निकालकर 367 राहत शिविरों में शरण दी गई है, तथा 370 से अधिक स्थानों पर पका हुआ भोजन वितरित किया जा रहा है। जलभराव के कारण जिन गांवों में लोग फंसे हैं, वहां भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टरों की सहायता से खाद्य सामग्री के पैकेट पहुंचाए गए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार आगामी पखवाड़े की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त राशन उपलब्ध है। स्थिति में सुधार को देखते हुए गंजाम जिले के सभी शैक्षणिक संस्थान 3 नवंबर तक बंद रखे गए हैं।

परिवहन सेवाएं बहाल और बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार

राज्य के परिवहन मंत्री बीबी जेना ने जानकारी दी है कि बहुदा नदी का जलस्तर नीचे आने के बाद कोलकाता और चेन्नई को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर यातायात सुचारु कर दिया गया है तथा रेल सेवाएं भी सामान्य हो गई हैं। जल संसाधन विभाग की सचिव शुभा शर्मा ने रुशिकुल्या नदी के जलस्तर का निरीक्षण कर स्पष्ट किया कि फिलहाल बाढ़ का कोई आसन्न खतरा नहीं है, हालांकि निचले इलाकों से पानी की निकासी में कुछ दिन का समय लग सकता है। एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन दल के सैकड़ों कर्मी बहाली कार्य में जुटे हैं। बिजली वितरण कंपनी के अनुसार दक्षिणी ओडिशा के 17 लाख उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति बहाल की जा चुकी है और आठ जिलों में 96 प्रतिशत से अधिक बहाली का काम पूरा हो चुका है।

आंध्र प्रदेश में 4,764 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक आकलन

आंध्र प्रदेश सरकार ने केंद्रीय मूल्यांकन टीम को सूचित किया है कि चक्रवात के कारण राज्य के 12 जिले प्रभावित हुए हैं, जिससे लगभग 4,764 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति का अनुमान है। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक चार लाख से अधिक किसानों की साढ़े तीन लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, और हजारों मकान व सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी चित्तरंजन दास के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम प्रभावित इलाकों का प्रत्यक्ष दौरा कर नुकसान का जायजा ले रही है।

प्रशासनिक समीक्षा और आगामी चक्रवाती चेतावनी पर सतर्कता

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर त्वरित गति से नुकसान का आकलन करने और राहत कार्यों को गति देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आगामी 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट के पास संभावित नए चक्रवाती सिस्टम के मद्देनजर सभी संबंधित विभागों को पूरी तरह सतर्क रहने और आधिकारिक सूचना प्रसारित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपदा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जा सके।

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