भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास में जहां कुछ बल्लेबाज अपनी विस्फोटक आक्रामकता तो कुछ अपनी रक्षात्मक तकनीक के लिए जाने गए, वहीं वीवीएस लक्ष्मण एक ऐसे अद्वितीय खिलाड़ी रहे जिन्होंने अपनी कलात्मक कलाई के जादू और विषम परिस्थितियों में अदम्य धैर्य के बल पर एक विशिष्ट पहचान बनाई। टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे विश्वसनीय मध्यक्रम के स्तंभ माने जाने वाले लक्ष्मण को चौथी पारी में उनके हैरतअंगेज रिकॉर्ड के कारण 'गॉड ऑफ फोर्थ इनिंग' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। एक नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्मे यह महान पूर्व क्रिकेटर अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग जैसे महान दिग्गजों के स्वर्णिम युग में भी लक्ष्मण ने अपनी विशिष्ट बल्लेबाजी शैली से भारतीय टेस्ट टीम में अपना एक अलग और अक्षुण्ण स्थान बनाए रखा।
ईडन गार्डन्स पर 281 रनों की वो जादुई और ऐतिहासिक पारी
लक्ष्मण के अंतरराष्ट्रीय करियर की सर्वाधिक विख्यात और अविस्मरणीय पारी वर्ष 2001 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध कोलकाता के ईडन गार्डन्स में देखने को मिली थी। फॉलोऑन का सामना कर रही भारतीय टीम के लिए उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर एक ऐसी ऐतिहासिक साझेदारी निभाई जिसने न केवल मैच का पासा पलटा, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास को ही नया मोड़ दे दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्मण का बल्ला सदैव आग उगलता था, जिसमें वर्ष 2000 में सिडनी में खेली गई 167 रनों की पारी और 2003 में एडिलेड में बनाए गए 148 रन शामिल हैं। इसके अलावा कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ 103 रनों का जुझारू शतक और नेपियर में न्यूजीलैंड के विरुद्ध 124 रनों की पारी भी उनके करियर की अनमोल धरोहर है, जिन्होंने भारत को कई बार हार के मुख से निकालकर ऐतिहासिक जीत दिलाई।
134 टेस्ट और 86 एकदिवसीय मैचों का समृद्ध करियर
लक्ष्मण ने नवंबर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था, जबकि अप्रैल 1998 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला वनडे मैच खेला। उन्होंने भारत के लिए 134 टेस्ट मैचों की 225 पारियों में 17 शतकों और 56 अर्धशतकों की बदौलत 8,781 रन बनाए, जिसमें उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 281 रन रहा। वहीं 86 एकदिवसीय मुकाबलों में उन्होंने 6 शतकों और 10 अर्धशतकों की मदद से 2,338 रन जोड़े। 18 अगस्त 2012 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले इस महान खिलाड़ी का जुड़ाव संन्यास के बाद भी खेल से अटूट बना रहा।
संन्यास के उपरांत भारतीय क्रिकेट को नए आयाम देने में योगदान
सक्रिय क्रिकेट से विदा लेने के पश्चात लक्ष्मण ने कॉमेंट्री, आईपीएल फ्रेंचाइजी और युवा प्रतिभाओं को तराशने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटॉर रहे, जिसकी देखरेख में टीम ने 2016 में आईपीएल ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। दिसंबर 2021 में उन्हें बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) का प्रमुख नियुक्त किया गया, जहां वे भारत की भावी पीढ़ी के खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे भारत की अंडर-19 और इंडिया-ए टीमों के मुख्य कोच के रूप में सेवाएं दे चुके हैं तथा मुख्य राष्ट्रीय टीम के साथ भी कई दौरों पर अंतरिम मुख्य कोच रहे हैं, जिनकी देखरेख में भारत ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था। खेल में उनके अभूतपूर्व योगदान हेतु वर्ष 2011 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था।

