भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए एक बड़ा और जनहितैषी निर्णय लिया है। अब साइबर ठगी के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज कराने के लिए निर्धारित न्यूनतम सीमा को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, अब 25 हजार रुपये तक की साइबर ठगी की घटनाओं की भी सीधे ई-एफआईआर दर्ज की जा सकेगी, जो पहले के 1 लाख रुपये के मापदंड से काफी कम है।
थाने के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति
इस नई पहल से साइबर अपराध के पीड़ितों को पुलिस थानों के अनावश्यक चक्कर काटने से बड़ी राहत मिलेगी। शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अब डिजिटल और सुगम हो गई है, जिससे पीड़ित घर बैठे ही अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे। इससे न केवल आम नागरिकों का समय बचेगा, बल्कि साइबर ठगी के मामलों में औपचारिकताएं पूरी करने की जटिलता भी काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे लोग बिना किसी डर या परेशानी के अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
जांच प्रक्रिया में आएगी गति
पुलिस का मानना है कि ई-एफआईआर की सीमा घटाने से शिकायतों का पंजीकरण तेजी से होगा, जिससे जांच प्रक्रिया को भी गति मिलेगी। समय पर शिकायत मिलने से पुलिस के पास संदिग्धों और ट्रांजेक्शन के सुराग जल्दी पहुंचेंगे, जिससे अपराधियों के खिलाफ समय रहते आवश्यक और कठोर कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम पुलिस की कार्यक्षमता को बढ़ाने और डिजिटल अपराधों पर नकेल कसने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
न्याय की दिशा में बड़ा कदम
मध्य प्रदेश पुलिस का यह निर्णय नागरिकों को जल्द न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राज्य पुलिस प्रशासन का मानना है कि साइबर अपराध के शिकार लोगों के लिए यह नई व्यवस्था एक बड़ी राहत है, जो शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश में साइबर अपराधों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और उन्हें पुलिस से त्वरित सहायता मिलने का भरोसा मजबूत होगा।

