मुरैना। चंबल नदी के उसेद-पिनाहट घाट पर स्टीमर सेवा शुरू नहीं होने को लेकर गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा हो गया। स्टीमर सेवा बहाल कराने की मांग कर रहे महुआ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शेर सिंह तोमर ने चंबल नदी में छलांग लगा दी। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घाट पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल नदी में पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रक्षाबंधन से पहले स्टीमर चलाने की मांग
जानकारी के मुताबिक, उसेद घाट और उत्तर प्रदेश के पिनाहट घाट के बीच स्टीमर सेवा लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। रक्षाबंधन को देखते हुए ग्रामीणों ने स्टीमर सेवा जल्द शुरू करने की मांग उठाई थी। बताया गया कि इस संबंध में प्रशासन को पहले ही आवेदन भी दिया गया था, लेकिन गुरुवार तक सेवा शुरू नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
घाट पर जुटे ग्रामीण
स्टीमर सेवा शुरू कराने की मांग को लेकर गुरुवार को ग्रामीण उसेद घाट पर पहुंचे और विरोध जताया। इसी दौरान कांग्रेस नेता शेर सिंह तोमर भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने स्टीमर सेवा शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई और मांग पूरी कराने के लिए विरोध प्रदर्शन किया।
140 किलोमीटर का फेरा या 4 किलोमीटर का सफर?
यह पूरा विवाद केवल एक आवागमन के साधन का नहीं, बल्कि जनता के समय और पैसों की भारी बर्बादी से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक:स्टीमर मार्ग की दूरी: उसैद-पिनाहट घाट से स्टीमर के जरिए उत्तर प्रदेश की दूरी महज 4 किलोमीटर है।
सड़क मार्ग की दूरी: स्टीमर बंद होने की स्थिति में लोगों को घूमकर 140 से 160 किलोमीटर तक लंबा सफर तय करना पड़ता है।
समय और ईंधन की बर्बादी: लंबा रूट होने के कारण न सिर्फ ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है, बल्कि लोगों का कीमती समय भी बर्बाद होता है। यही वजह थी कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इस सेवा को दोबारा शुरू करने की मांग कर रही थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामला अटका हुआ था।
क्यों बंद किया गया था स्टीमर संचालन?
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक पुराना और डरावना हादसा भी जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बीते 16 अगस्त को नगरा घाट से उत्तर प्रदेश के कैंजरा घाट की तरफ जा रहा एक यात्रियों से भरा हुआ स्टीमर चंबल नदी के तेज बहाव में बह गया था। वह मंजर बेहद डरावना था, क्योंकि करीब तीन घंटे तक वह स्टीमर अनियंत्रित होकर पानी में बहता रहा और उसमें सवार 64 मासूम लोगों की जान पर बन आई थी। गनीमत यह रही कि समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया गया और सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। उस बड़े हादसे के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने नगरा घाट के स्टीमर को जब्त कर लिया था और एहतियात के तौर पर उसैद-पिनाहट घाट का स्टीमर संचालन भी रोक दिया गया था।
पुलिस की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
जैसे ही कांग्रेस नेता शेर सिंह तोमर ने चंबल नदी में छलांग लगाई, घाट पर पहले से ही तैनात पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। महुआ थाना प्रभारी उपेंद्र पाराशर ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। बिना एक पल गंवाए, थाना प्रभारी ने तुरंत मौके पर मौजूद गोताखोरों और पुलिसकर्मियों को नदी में उतारा। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तत्परता दिखाते हुए कांग्रेस नेता को सुरक्षित नदी से बाहर निकाल लिया गया। हालांकि नेता को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई है, लेकिन इस दुस्साहसिक कदम ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
नेता के नदी में कूदने के बाद गरमाई सियासत
इस घटना के बाद से मुरैना और आसपास के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल के नेता इस मुद्दे को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। जनता का एक बड़ा वर्ग भी अब सड़क पर उतरकर स्टीमर सेवा को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग कर रहा है। प्रशासन के लिए अब यह चुनौती बन गई है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए कैसे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से शुरू किया जाए, ताकि आम जनता को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके। फिलहाल पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

