कर्ज माफी की उम्मीद में किसान, मध्य प्रदेश के 12 जिलों को मिल सकती है राहत

भोपाल। प्रदेश में कृषकों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान केंद्रित है। विगत दो दिवस पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पांढुर्णा प्रवास के दौरान स्थानीय किसानों से सीधा संवाद कायम कर उनके हितों की रक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं को गति देने का संकल्प दोहराया। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों में सामान्य से अत्यंत कम वर्षा दर्ज किए जाने के बावजूद, तकनीकी दिशा-निर्देशों एवं सूखा आकलन के कड़े मापदंडों के कारण उन्हें आधिकारिक रूप से 'सूखाग्रस्त' घोषित करने में प्रशासनिक व्यवधान आ रहा है।

कम वर्षा के बावजूद तत्काल सूखा घोषित न कर पाने का मुख्य कारण केंद्र एवं राज्य सरकार की गाइडलाइन में तय मापदंड हैं। इसमें केवल वर्षा के आंकड़ों की कमी ही नहीं, बल्कि बुवाई का कुल रकबा, फसल की क्षति का वास्तविक आकलन और अन्य कृषि संकेतक भी शामिल हैं। हालांकि, इन 12 जिलों के अन्नदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए सरकार अन्य वैकल्पिक उपायों के माध्यम से वित्तीय और ढांचागत सहायता देने पर विचार कर रही है।

आलीराजपुर में सबसे अधिक स्थिति चिंताजनक

प्रदेश भर में न्यून वर्षा के लिहाज से सर्वाधिक प्रभावित जिला आलीराजपुर है, जहाँ औसत से 51 प्रतिशत कम पानी बरसा है—यानी यहाँ सामान्य से आधी वर्षा ही दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में 27 प्रतिशत और भाजपा प्रदेश नेतृत्व से जुड़े बैतूल जिले में 31 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है। इन जिलों के अलावा धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, इंदौर, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा भी कम वर्षा के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रहे हैं।

किसानों को राहत देने के लिए इन विकल्पों पर विचार

  • रबी और खरीफ के रकबे का आकलन: वर्तमान में खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुवाई जारी है। यदि विगत वर्षों की तुलना में बोए गए रकबे में कोई बड़ा अंतर दृष्टिगोचर होता है, तो उसे राहत का मुख्य आधार बनाया जा सकता है।

  • केंद्रीय आर्थिक पैकेज का प्रावधान: कम वर्षा की स्थिति पर केंद्र सरकार भी गंभीरता से विचार कर रही है। नई दिल्ली में विभिन्न स्तरों पर आयोजित बैठकों के माध्यम से राज्यों से आंकड़े जुटाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ऐसे कम वर्षा वाले जिलों के लिए अलग से विशेष आर्थिक पैकेज का प्रावधान कर सकती है।

  • पेयजल योजनाओं के लिए अतिरिक्त निधि: आने वाले समय में राज्य सरकार इन प्रभावित 12 जिलों में पेयजल संकट से निपटने तथा संबंधित जल जीवन योजनाओं के सुचारू संचालन हेतु अलग से अतिरिक्त बजट आवंटित कर सकती है।

सूखा घोषित करने से जुड़े वित्तीय जोखिम

यदि इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है, तो राज्य सरकार पर किसानों को फसल क्षति मुआवजा देने का बहुत बड़ा वित्तीय भार आएगा। ऐसी स्थिति में किसानों द्वारा लिए गए कृषि ऋणों को पूर्णतः माफ करना होगा अथवा उनके ब्याज और बीमा प्रीमियम की राशि में शत-प्रतिशत छूट प्रदान करनी होगी।

दो स्तरों पर प्रशासनिक कार्ययोजना तैयार

  • विस्तृत रिपोर्ट की मांग: राज्य शासन द्वारा सभी 12 कम वर्षा वाले जिलों के प्रशासन से अल्प वर्षा से उत्पन्न चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए आवश्यक वित्तीय आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन कर कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है।

  • वैकल्पिक वित्तीय सहायता की खोज: राज्य और केंद्र स्तर पर ऐसे कानूनी एवं प्रशासनिक विकल्प तलाशे जा रहे हैं, जिनसे बिना सूखा घोषित किए भी इन जिलों को अधिकतम संभव आर्थिक और विकासपरक सहायता मुहैया कराई जा सके।

Latest news

Related news