चंडीगढ़। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक सहित कुल 39 पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। इस वैश्विक प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम रखते हुए देश के कुल पदकों में से लगभग एक-तिहाई योगदान दिया। प्रदेश के एथलीटों ने 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक सहित कुल 11 पदक जीतकर एक बार फिर साबित कर दिया कि हरियाणा देश की खेल राजधानी है। हालांकि बर्मिंघम 2022 के मुकाबले इस बार कुल पदकों की संख्या कम रही, लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण खिलाड़ियों का प्रदर्शन नहीं बल्कि मेजबान देश द्वारा बजट कटौती के चलते खेलों की संख्या में की गई बड़ी कमी रही।
मुक्केबाजों ने रिंग में दिखाया दम, भाला फेंक और शॉटपुट में खिलाड़ियों ने रचे नए कीर्तिमान
इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के मुक्केबाजों का प्रदर्शन सबसे उत्कृष्ट रहा। भिवानी के सचिन सिवाच, साक्षी चौधरी ढांडा, प्रीति पंवार, प्रिया घणघस, जैस्मीन लांबोरिया और हिसार के अंकुश पंघाल ने रिंग में विपक्षी खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, वहीं हिसार के नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक हासिल किया। एथलेटिक्स क्षेत्र में झज्जर की शर्मीला ने महिला शॉटपुट (एफ-57) स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। इसके अतिरिक्त भाला फेंक स्पर्धा में पानीपत के नीरज चोपड़ा ने रजत और भिवानी के यशवीर ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। भिवानी की सीमा ने डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर एथलेटिक्स में नई उपलब्धि दर्ज कराई।
मेजबान देश ने घटाई प्रमुख खेलों की सूची, कुश्ती और हॉकी हटने से 14 पदकों का नुकसान
बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 19 खेल शामिल थे, जबकि ग्लासगो में बजट की सीमाओं के कारण केवल 10 खेलों का ही आयोजन किया गया। इस फैसले के चलते कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी, क्रिकेट, निशानेबाजी और टेबल टेनिस जैसे 9 प्रमुख खेलों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। वर्ष 2022 के खेलों में अकेले कुश्ती स्पर्धा से ही हरियाणा के पहलवानों ने 11 पदक प्राप्त किए थे, जिनमें बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, रवि दहिया और साक्षी मलिक के स्वर्ण पदक शामिल थे। इसके अलावा हॉकी और क्रिकेट टीमों में शामिल हरियाणवी खिलाड़ियों के पदकों को जोड़कर देखें तो मुख्य खेलों के बाहर होने से राज्य के कम से कम 14 पक्के पदकों के अवसर पूरी तरह समाप्त हो गए।
राज्य सरकार देगी करोड़ों की प्रोत्साहन राशि, मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की सफलता को बताया प्रेरणादायक
खिलाड़ियों के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी पदक विजेताओं, उनके प्रशिक्षकों और अभिभावकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 7 अकेले हरियाणा की माटी के लाल लेकर आए हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार स्वर्ण पदक विजेताओं को 1.50 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को 75 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को 50 लाख रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा चौथे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को 15 लाख रुपये तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को 7.50 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही आधुनिक सुविधाओं, निःशुल्क कोचिंग और छात्रवृत्तियों के बल पर प्रदेश के युवा भविष्य में भी तिरंगे का मान बढ़ाते रहेंगे।

