दिल्ली: जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए साहिल लोहचब का मामला सामने आया है। इस घटना के कारण उनके जीवन और भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
साहिल का पुलिस में भर्ती होने का सपना टूटा
मूल रूप से बूपनियां गांव के रहने वाले और वर्तमान में नजफगढ़ में रह रहे साहिल का सपना दिल्ली पुलिस में भर्ती होकर अपने दिव्यांग पिता का सहारा बनने का था। लेकिन प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई, जिसके कारण अब वे मेडिकल परीक्षा पास नहीं कर सकते और उनका यह सपना अधूरा रह गया है।
एफआईआर दर्ज कराने में आई मुश्किलें
साहिल के अनुसार, उन्होंने कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाने में कई बार संपर्क किया, लेकिन शुरुआती दौर में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया और अब पीड़ित परिवार को आगे की पुलिस कार्रवाई तथा जांच के स्पष्ट होने का इंतजार है।
भविष्य पर संकट और आर्थिक संघर्ष
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी। साहिल टैक्सी चलाकर और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन तैयारी भी कर रहे थे। अब आंख की रोशनी जाने के बाद उनके सामने इलाज और आजीविका की एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।

