हर खराब सीन एआई नहीं होता: अरुण कुमार

मुंबई । नेशनल अवॉर्ड विजेता और एनिमेशन इंडस्ट्री में तीन दशकों का अनुभव रखने वाले सीबी अरुण कुमार ने दर्शकों की उस बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है जिसमें वे किसी भी खराब दिखने वाले विजुअल को तुरंत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का टैग दे देते हैं।  ज्ञात हो कि हाल ही में रामायण और जेलर 2 जैसी बड़ी फिल्मों के टीजर और ट्रेलर आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके वीएफएक्स और विजुअल्स को लेकर खूब ट्रोलिंग हुई है, जिस पर अरुण कुमार ने अपनी राय रखी है। सीबी अरुण कुमार ने स्पष्ट किया है कि हर खराब दिखने वाला दृश्य एआई से नहीं बनता और इस तरह का त्वरित निष्कर्ष पारंपरिक वीएफएक्स कलाकारों की मेहनत के साथ अन्याय है।
उनका कहना है कि अगर कोई विजुअल अच्छा नहीं लग रहा है, तो उस पर सीधा एआई का ठप्पा लगा देना गलत है। उन्होंने आज के दर्शकों के नजरिए में आए बदलाव का विश्लेषण करते हुए बताया कि 1980 के दशक में जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब कंटेंट देखने के साधन बहुत सीमित थे। लोग या तो सिनेमाघरों में फिल्में देखते थे या सिर्फ एक सरकारी टीवी चैनल होता था। लेकिन इंटरनेट, डीवीडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आगमन के बाद, आज हर इंसान के हाथ में कंटेंट है, और हर दर्शक खुद एक फिल्म क्रिटिक बन चुका है जो हर छोटे सीन को बारीकी से नोटिस करता है। अरुण कुमार ने फिल्म निर्माताओं को सलाह दी है कि वे दर्शकों को पर्दे के पीछे का काम दिखाएं, ताकि लोग उनकी असली मेहनत को समझ सकें और मेकर्स पर भरोसा कर सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दर्शकों का अविश्वास इतना बढ़ गया है कि हॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन को भी अपनी फिल्मों में दिखाए गए दृश्यों को वीएफएक्स से नहीं, बल्कि असल में शूट किए जाने का सबूत देना पड़ता है। आने वाले समय को लेकर सीबी अरुण कुमार ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ेगा, यह समस्या और ज्यादा गहरी होती जाएगी। एआई इंसानों के बनाए किसी भी विजुअल को आसानी से कॉपी कर सकता है, जिससे आम दर्शकों के लिए असली वीएफएक्स और एआई से बने शॉट्स के बीच अंतर पहचानना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे कैसे दर्शकों को कुछ नया और एंगेजिंग कंटेंट दे पाते हैं, जिससे उनका भरोसा सिनेमा पर बना रहे।

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