छात्रों के आंदोलन के चलते दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया Jamia Millia Islamia ने लगभग दो दशक के बाद स्टूडेंट यूनियन चुनाव फिर से शुरू करने का ऐलान किया गया. हलांकि इसके कुछ ही घंटों बाद सोमवार को कैंपस में नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. स्टूडेंट्स ने समय पर चुनाव प्रक्रिया और चीफ इलेक्शन ऑफिसर की नियुक्ति की मांग की.
Jamia Millia Islamia परिसर में घुसी 100 छात्राएं
इससे पहले दिन में, करीब 100 छात्राएं अलग-अलग गेट से कैंपस में घुसीं, जिनमें से कुछ गेट नंबर 7 के बाहर जमा हुईं, जबकि कई प्रोटेस्टर्स को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में भी लिया. स्टूडेंट्स ने “दिल्ली पुलिस, वापस जाओ” के नारे लगाए क्योंकि जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से शुरू करने को लेकर तनाव बना हुआ है, जिसके चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं.
VIDEO | Delhi: Scuffles broke out between protesting students and paramilitary personnel at Jamia Millia Islamia on Monday as the students refused to end their agitation for restoration of students’ union elections despite the university issuing an order for the polls earlier in the day.
Rehan Khan, who is among two students on an indefinite hunger strike for 12 days, alleged that the administration was attempting to distract the protesters from their demands.
“Our first demand was that student union elections should be revived and dates for polls be declared,” he said, questioning the absence of a deadline for the approval of the constitution.
“The notice provided by the university is them trying to distract us, but we will not go back until our demands are met,” Khan told PTI.
He alleged that the administration wanted the protesters to accept the notice and end their hunger strike, adding that attempts had also been made to force them to break their fast.
Khan said the administration had told the protesters that a draft constitution would be prepared by December 20, following which it would be approved and election dates announced within 15 days.
“Even if the constitution is drafted by December 20, what is the guarantee that the administration will accept the constitution?” he asked, adding that the students had sought a definite timeline for its approval as well.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 26, 2026
छात्र संघ चुनाव के ऐलान के बाद भी क्यों जारी है आंदोलन
हिंदुस्तान टाइम्स ने JMI के लॉ फैकल्टी के स्टूडेंट आसिफ खान के हवाले से बताया, “हम चाहते हैं कि एडमिनिस्ट्रेशन एक चीफ इलेक्शन ऑफिसर अपॉइंट करे और इलेक्शन प्रोसेस को फास्ट-ट्रैक करे. तब तक, प्रोटेस्ट जारी रहेगा.”
एक 20 वर्षीय छात्र ने भी कहा कि एक निर्वाचित छात्र निकाय की अनुपस्थिति ने छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन तक अपनी शिकायतें पहुंचाने के लिए एक प्रभावी माध्यम के बिना छोड़ दिया है.
छात्र ने कहा, “दाखिले से लेकर हॉस्टल की सीटों से लेकर मेस में खाने तक, जामिया में हर चीज में समस्या है. हमारे, छात्रों और जामिया प्रशासन के बीच कोई नहीं है. हम उस अंतर को पाटने के लिए एक संघ चाहते हैं.”
जामिया ने स्टूडेंट यूनियन चुनाव का ऐलान किया
सोमवार को, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने ऐलान किया कि स्टूडेंट यूनियन के संविधान को मंज़ूरी मिलने के 15 दिनों के अंदर स्टूडेंट यूनियन के चुनाव होंगे, HT ने पहले बताया था.
यह ऐलान JMISU को फिर से बनाने को लेकर कैंपस में लगभग दो हफ़्ते तक चले विरोध प्रदर्शनों और भूख हड़ताल के बाद हुआ. यह फ़ैसला स्टूडेंट रिप्रेज़ेंटेटिव और यूनिवर्सिटी अधिकारियों के बीच लगभग पाँच घंटे की बातचीत के बाद लिया गया. एडमिनिस्ट्रेशन ने कुछ स्टूडेंट्स को दिए गए सस्पेंशन ऑर्डर और कारण बताओ नोटिस भी रद्द कर दिए और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सिक्योरिटी कर्मचारियों के बर्ताव की जाँच का भरोसा दिया.
छात्र संघ चुनाव को लेकर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा
JMI के रजिस्ट्रार प्रोफ़ेसर महताब आलम रिज़वी ने एक बयान में कहा, “जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन का चुनाव, स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान को मंज़ूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के बाद होगा. स्टूडेंट्स को दिए गए सस्पेंशन और कारण बताओ नोटिस रद्द किए जाते हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान सिक्योरिटी कर्मचारियों के कामों की जाँच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी.”
यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स से यह भी कहा कि वे आंदोलन के दौरान एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ दिए गए किसी भी बदनाम करने वाले बयान, काम या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करके माफी मांगें.
छात्रों ने मांगें पेंडिंग रहने की वजह से प्रोटेस्ट खत्म करने से मना कर दिया
यह आंदोलन 12 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब तीन स्टूडेंट्स ने स्टूडेंट्स यूनियन को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की. 21 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी ने यूनियन का संविधान बनाने के लिए एक कमेटी बनाई. हालांकि, स्टूडेंट्स ने इलेक्शन के लिए एक फॉर्मल नोटिफिकेशन और एक साफ टाइमलाइन की मांग जारी रखी.
इसके बाद चार स्टूडेंट्स ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. स्टूडेंट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ सोमवार सुबह करीब 4 बजे तक चली बातचीत के बाद, दो स्टूडेंट्स ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी, जबकि एबिन बेसिल और रेहान खान हड़ताल पर बने रहे.
चुनावों पर एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसे और डिसिप्लिनरी नोटिस वापस लेने के बावजूद, प्रोटेस्ट करने वालों ने कहा कि कई मांगें अभी भी अनसुलझी हैं और उन्होंने आंदोलन खत्म करने से मना कर दिया.
किन मांगो को छात्र अनसुलझी बता रहे हैं
उनकी मांगों में ऑनलाइन क्लास बंद करना, कैंटीन और लाइब्रेरी फिर से खोलना, स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान को मंज़ूरी देने के लिए एक तय टाइमलाइन और चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफ़ा शामिल है.
इससे पहले, यूनिवर्सिटी ने प्रोटेस्ट वाली जगह पर बढ़ते तनाव की वजह से स्टूडेंट्स की सुरक्षा का हवाला देते हुए तुरंत सभी कोर्स की क्लास ऑनलाइन मोड में कर दी थीं. यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को कैंपस आने से बचने की भी सलाह दी थी, और गेट और लाइब्रेरी अगली सूचना तक बंद रहने वाले हैं.
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