किताबें हैं, सवाल हैं… जवाब देने वाला शिक्षक नहीं, डिजिटल स्क्रीन पर निर्भर बच्चे

ग्रेटर नोएडा: कक्षा में प्रवेश करते ही सबसे पहले ध्यान वहां बैठे मासूम विद्यार्थियों पर जाता है। सामने किताबें और कॉपियां खुली हैं, और सभी की आंखें दीवार पर लगी स्मार्ट स्क्रीन पर टिकी हुई हैं। स्क्रीन पर चल रहे शैक्षणिक वीडियो के सहारे बच्चे पाठ समझने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पूरी कक्षा में उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई शिक्षक उपस्थित नहीं है।

स्क्रीन से चल रही पढ़ाई, लेकिन संवाद और मार्गदर्शन गायब

डिजिटल स्क्रीन पर वीडियो शिक्षक पाठ समझा रहा है और बच्चे उसे देखकर कॉपियों में उतार रहे हैं। जिन्हें समझ आ रहा है, वे लिख लेते हैं, लेकिन किसी सवाल पर अटक जाने वाले बच्चे चुपचाप स्क्रीन को निहारते रह जाते हैं। पढ़ाई तो हो रही है, मगर किसी भी कक्षा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—शिक्षक और छात्र के बीच का जीवंत संवाद—पूरी तरह नदारद है। बच्चे बार-बार अध्यापकों की खाली पड़ी कुर्सी की ओर उम्मीद से देखते हैं।

जेवर क्षेत्र के 20 से अधिक विद्यालयों में यही हालात

यह मार्मिक स्थिति केवल एक विद्यालय की नहीं है। जेवर ब्लॉक के 20 से अधिक सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की घोर कमी के चलते शिक्षण व्यवस्था तकनीक के भरोसे छोड़ दी गई है। तकनीक स्क्रीन पर पाठ तो चला सकती है, किंतु किस बच्चे को कहां कठिनाई आ रही है, यह भांपने के लिए इंसानी संवेदना और शिक्षक की मौजूदगी अनिवार्य है। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है जिन्हें समझने में थोड़ा अधिक समय लगता है।

मजबूरी में डिजिटल माध्यम अपना रहे शिक्षक

शिक्षकों का कहना है कि एक ही समय में multiple कक्षाओं की जिम्मेदारी होने के कारण वे मजबूरन बच्चों को स्मार्ट बोर्ड के सामने बैठाकर दूसरी कक्षा में पढ़ाने चले जाते हैं। प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों पर जूनियर कक्षाओं का भी प्रभार है। वहीं अभिभावकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे पढ़ाई के लिए पूरी तरह स्कूल के अध्यापकों पर ही निर्भर हैं, ऐसे में यह स्थिति बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसी है।

जेवर क्षेत्र के प्रमुख स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात

विद्यालय का नामकुल छात्र संख्यातैनात शिक्षक
कंपोजिट स्कूल तिरथली4106
कंपोजिट स्कूल जेवर खादर4108
प्राथमिक स्कूल घनसिया781
प्राथमिक स्कूल जहांगीरपुर-21533
प्राथमिक स्कूल बांकापुर501
कंपोजिट स्कूल बीकापुर602
एकल शिक्षक वाले स्कूलप्राथमिक स्कूल गोविंदगढ़, परसौदा, बूढ़ा घरबार आदि1 (प्रत्येक)

क्या कहते हैं छात्र और जिम्मेदार अधिकारी?

  • छात्रों का दर्द: विद्यार्थियों (कुमकुम, मनीष, नीतू और लवकुश) का कहना है कि अधिकांश पीरियड में शिक्षक मौजूद नहीं रहते। डिजिटल बोर्ड पर वीडियो चलाकर शिक्षक चले जाते हैं, जिससे मन में उठने वाले शंकाओं और सवालों के उत्तर नहीं मिल पाते।

  • बेसिक शिक्षा अधिकारी का पक्ष: बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार का कहना है कि वर्तमान में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया गतिमान है। शीघ्र ही छात्र संख्या के मानक के अनुसार सभी विद्यालयों में आवश्यक शिक्षकों की तैनाती कर दी जाएगी।

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