सत्यनिकेतन हादसा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट,जस्टिस अमानुल्लाह बोले-‘हमारे दिमाग में कुछ है’,करेंगे सुनवाई

Satya Niketan Building Collapse नई दिल्ली : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. राजधानी में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े लंबित मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को सत्य निकेतन हादसे की जानकारी दी गई. मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को इस पर सुनवाई करने की बात कही है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की जरूरत है. उन्होंने सुनवाई की मांग पर कहा, “हमारे दिमाग में कुछ है, हम परसों सुनवाई करेंगे.” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर संबंधित मामले को दिल्ली हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने पर विचार किया जा सकता है.

Satya Niketan Building Collapse:एमिकस क्यूरी ने दी हादसे की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों से जुड़े मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अजित कुमार सिन्हा ने सत्य निकेतन में हुए हादसे का मुद्दा उठाया.

उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के मुताबिक दिल्ली में अवैध निर्माण को लेकर सर्वे और निरीक्षण का काम चल रहा है. इसी दौरान सत्य निकेतन में इमारत गिरने की गंभीर घटना सामने आई.

सिन्हा ने यह भी बताया कि हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है. उन्होंने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से इस मामले में पारित आदेश की जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट को दी.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया भयावह हादसा

एमिकस क्यूरी की ओर से मामला उठाए जाने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्ट के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने सत्य निकेतन हादसे को बेहद भयावह बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की.

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के बारे में जानकारी दी और बताया कि हाई कोर्ट ने घटना को गंभीरता से लिया है तथा मामले में कार्रवाई की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट बोला- समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की जरूरत

सॉलिसिटर जनरल की दलील सुनने के बाद जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित मामले से काफी हद तक मिलता-जुलता है.

कोर्ट ने कहा कि दोनों मामलों में कुछ हद तक ओवरलैप है. जस्टिस अमानुल्लाह ने इस तरह की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की आवश्यकता बताई.

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामले को दिल्ली हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है. अब इस मामले में 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर है.

क्या था सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश?

अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में दिल्ली के साकेत और मालवीय नगर के साथ-साथ लखनऊ में हुए अग्निकांड का भी उल्लेख किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ में अवैध निर्माण तथा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी.

स्थिति का आकलन करने के लिए कोर्ट ने एक विशेष निरीक्षण टीम बनाने का निर्देश भी दिया था. इस टीम में आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के दो वरिष्ठ प्रोफेसर और दो ड्राफ्ट्समैन शामिल हैं.

कैसे हुआ सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा?

सत्य निकेतन इलाके में लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारत रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे ढह गई थी.

हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन इनमें से 7 लोगों की मौत हो गई. घटना ने दिल्ली में अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इमारत मालिक समेत तीन लोग गिरफ्तार

हादसे के मामले में पुलिस ने इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, उनके 81 वर्षीय पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे 52 वर्षीय महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है.

पुलिस की कार्रवाई के अलावा भवन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है.

MCD अधिकारियों पर भी गिरी गाज

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है.

इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी में लापरवाही कहां हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी.

सत्य निकेतन हादसे ने फिर उठाए अवैध निर्माण पर सवाल

सत्य निकेतन की इमारत गिरने की घटना ने दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. खासतौर पर PG और किराये के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतों में सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

अब सुप्रीम कोर्ट की 10 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है. कोर्ट की टिप्पणी से संकेत मिल रहा है कि राजधानी में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण के मुद्दे को केवल एक स्थानीय घटना के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक और राष्ट्रीय समस्या के रूप में देखा जा सकता है.

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