खुशखबरी! खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध से पहले के स्तर तक पहुंची

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से भारत एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी हालांकि, अब खाड़ी के देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध से पहले के स्तर तक पहुंच गई है। समुद्री खुफिया और शोध कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 28 सितंबर तक ईरान को छोड़कर खाड़ी के देशों से प्रतिदिन औसतन 1.65 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया गया, जो युद्ध-पूर्व के स्तर के बराबर है।
यह भारत के लिए विशेष रूप से राहत की बात है, क्योंकि भारत अपनी कुल ऊर्जा का ज्यादातर हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ईरान युद्ध के चरम पर मार्च में यह निर्यात घटकर 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया था। युद्ध से पहले करीब 83 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरता था। इस रिकवरी का श्रेय वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों और तेल को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करने की व्यवस्था को दिया गया है। सितंबर में करीब 40 फीसदी तेल का निर्यात सऊदी अरब और यूएई की पाइपलाइनों के जरिये किया गया, जिन्हें होर्मुज से गुजरने की जरुरत नहीं पड़ती।
सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिये लाल सागर के तट पर स्थित यानबू तक तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व के 8 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर जून में 43 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी। इसी तरह यूएई ने अबू धाबी की कच्चे तेल की पाइपलाइन के जरिये फुजैरा बंदरगाह तक आपूर्ति को युद्ध-पूर्व के 11 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 27 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी है। इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बताया है कि उसके सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने के लिए रणनीतिक भंडार से अब तक 32.5 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी किए हैं। यह वैश्विक स्तर पर बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है।

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