मालगाड़ी के तीन डिब्बे पटरी से उतरे, रेलवे प्रशासन ने शुरू की जांच

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले कोटा क्षेत्र के करगी रोड रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बड़ा और भीषण ट्रेन हादसा सामने आया है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 से गुजर रही एक तेज रफ्तार मालगाड़ी अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। भारी वजन से लदे होने के कारण मालगाड़ी के तीन विशालकाय डिब्बे (वैगन) अचानक कड़ाके की आवाज के साथ पटरी से नीचे उतर गए (डिरेल हो गए)।

ट्रेन के बेपटरी होते ही लोहे के घिसटने की भयावह आवाज और कंपन से पूरा स्टेशन परिसर गूंज उठा, जिसके कारण वहां मौजूद यात्रियों, स्थानीय दुकानदारों और रेल कर्मियों के बीच भारी अफरा-तफरी और दहशत का माहौल निर्मित हो गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि मालगाड़ी होने के कारण और प्लेटफॉर्म पर उस वक्त भीड़ न होने की वजह से इस गंभीर रेल हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि (जान-माल का नुकसान) नहीं हुई है और एक बड़ा टोन टल गया।

इंजन रफ्तार में आगे निकल गया, जबकि पीछे के डिब्बे ट्रैक को चीरते हुए पलटने से बचे

करगी रोड रेलवे स्टेशन पर मौजूद चश्मदीदों और रेलवे के केबिन मैन से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह हादसा बेहद अचानक और अप्रत्याशित था:

  • झटके के साथ अलग हुए डिब्बे: मालगाड़ी जब स्टेशन के मुख्य ट्रैक को पार कर रही थी, तभी अचानक एक जोरदार झटका लगा। गाड़ी का मुख्य इंजन और आगे के कई डिब्बे तो गति के कारण काफी आगे निकल गए, लेकिन ट्रेन के पिछले हिस्से में जुड़े तीन डिब्बे पटरी छोड़कर गिट्टियों पर आ गिरे।

  • गार्ड ने सूझबूझ से रुकवाई ट्रेन: ट्रेन के डिरेल होते ही पीछे के डिब्बे तिरछे हो गए और ट्रैक को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। मालगाड़ी के गार्ड ने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाने और लोको पायलट को वायरलेस पर सूचना देने की तत्परता दिखाई, जिससे इंजन कुछ दूरी पर जाकर रुक गया और पूरी ट्रेन को पलटने से बचा लिया गया। यदि ट्रेन की रफ्तार थोड़ी और अधिक होती, तो डिब्बे प्लेटफॉर्म को तोड़ते हुए स्टेशन मास्टर के दफ्तर में घुस सकते थे।

जेसीबी मशीन का बकेट बना काल? हादसे के पीछे लापरवाही की चौंकाने वाली थ्योरी आई सामने

यद्यपि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने अभी तक इस रेल दुर्घटना के मुख्य तकनीकी कारणों की लिखित घोषणा नहीं की है, लेकिन घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर दावा किया है:

  • ट्रैक के पास चल रहा था कंस्ट्रक्शन: ग्रामीणों के अनुसार, रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के रेलवे ट्रैक के पास पिछले कुछ दिनों से निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें एक भारी-भरकम जेसीबी (JCB) मशीन लगी हुई थी। आरोप है कि कार्य के दौरान लापरवाही बरतते हुए जेसीबी मशीन का भारी लोहे का बकेट (खोदने वाला हिस्सा) मालगाड़ी के आने के समय ट्रैक के बेहद करीब आ गया था, जिससे वह ट्रेन के निचले हिस्से में फंस गया और उसने डिब्बों को पटरी से उखाड़ दिया।

  • शॉर्टकट का जानलेवा प्रयास: वहीं, कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी कहना है कि कुछ मजदूर या स्थानीय लोग जेसीबी का भारी-भरकम बकेट लेकर शॉर्टकट के चक्कर में रेलवे लाइन पार करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच अचानक वहां मालगाड़ी आ पहुंची। हड़बड़ाहट में बकेट वहीं छूट गया और ट्रेन के पहियों के नीचे आकर फंस गया, जिससे यह पूरी दुर्घटना घटित हुई। हालांकि, रेलवे प्रशासन इस थ्योरी को पूरी तरह से जांच के दायरे में रखकर देख रहा है।

बिलासपुर से रवाना हुई एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन; आरपीएफ और तकनीकी विशेषज्ञों ने संभाला मोर्चा

हादसे की डरावनी खबर जैसे ही बिलासपुर रेलवे नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) तक पहुंची, पूरे रेल मंडल में खलबली मच गई। बिना एक पल की देरी किए बिलासपुर मुख्यालय से वरिष्ठ मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के निर्देश पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे के वरिष्ठ तकनीकी इंजीनियरों व डॉक्टरों की एक विशेष टीम 'अल्टीमेट एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन' (ART) के साथ तत्काल करगी रोड स्टेशन के लिए रवाना की गई।

मौके पर पहुंची आरपीएफ की टीम ने सबसे पहले प्लेटफॉर्म नंबर-2 के आसपास के पूरे इलाके को घेरकर आम लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया ताकि राहत कार्य प्रभावित न हो। इसके बाद क्रेन और हाइड्रोलिक जैक की मदद से पटरियों से उतरे भारी-भरकम वैगनों को दोबारा ट्रैक पर लाने (री-रेलिंग) का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी करेगी असली कारणों की जांच; बिलासपुर रूट का रेल परिचालन प्रभावित

इस हादसे के कारण बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग के अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों के सुचारू संचालन पर आंशिक असर पड़ा है। कई यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोका गया है, जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़े लहजे में कहा है कि इस पूरी लापरवाही की गहराई से जांच की जाएगी।

रेलवे प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि:

"यह हादसा बेहद गंभीर है और इसके पीछे किसी मानवीय लापरवाही या तकनीकी खराबी, दोनों ही संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। जेसीबी मशीन के बकेट वाले दावे की सत्यता जानने के लिए स्टेशन के पास लगे कैमरों की जांच की जा रही है। सुरक्षा और संरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके वास्तविक और तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी) का गठन कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह रेलवे का कर्मचारी हो या कोई बाहरी ठेकेदार, उसके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान ट्रैक को जल्द से जल्द बहाल करने पर है।"

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