Chhattisgarh Vidhansabha Monsoon Session रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार (13 जुलाई) को भावुक माहौल में शुरू हुआ. सत्र के पहले दिन सदन ने पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी कलाकार तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उनके निधन का उल्लेख करते हुए शोक प्रस्ताव पढ़ा, जिसके बाद सदन के सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
गौरतलब है कि 5 जुलाई को 70 वर्ष की आयु में रायपुर स्थित एम्स में तीजन बाई का निधन हो गया था। उनके निधन को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की लोक कला और संस्कृति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है.
आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के प्रथम दिवस पर सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्व. श्रीमती तीजन बाई जी के देहांत उपरांत पर सदन में निधन उल्लेख किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की #chhattisgarh #tijanbai #cultural pic.twitter.com/3YBBJrhoCP
— DD NEWS CHHATTISGARH (@ddnewsraipur) July 13, 2026
Chhattisgarh Vidhansabha Monsoon Session: CM विष्णु देव साय ने बताया संस्कृति का अनमोल रत्न
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपनी समृद्ध लोक परंपरा के सबसे अनमोल रत्नों में से एक को खो दिया है. उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी गायन की ‘कापालिक’ शैली को नई पहचान दिलाई और अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर भारतीय लोक कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि गायन, अभिनय और प्रभावशाली कहानी कहने की उनकी अनूठी शैली ने दुनिया भर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की मिसाल था.
सामाजिक बाधाओं को तोड़कर बनाई अलग पहचान
सीएम साय ने कहा कि जब पंडवानी जैसी लोक परंपरा में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी, तब तीजन बाई ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने आने वाली पीढ़ियों की महिला कलाकारों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया.
सभी दलों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अलावा नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री राजेश अग्रवाल समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने तीजन बाई के लोक कला और संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
तीजन बाई ने अपने जीवनभर पंडवानी की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया. उनके योगदान को भारतीय लोक संस्कृति के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा.

