Nanda Devi reached : जामनगर के वडीनार (कांडला) पोर्ट पर मंगलवार सुबह एक बड़ा एलपीजी कार्गो लेकर जहाज एमटी नंदा देवी पहुंचा. दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के अनुसार, जहाज सुबह करीब 2:30 बजे पोर्ट के एंकरिज क्षेत्र में पहुंचा.
After #Shivalik, another LPG tanker, #NandaDevi, is set to arrive in India on Tuesday. Carrying more than 47,000 metric tons of liquefied petroleum gas. #LPG #India | @BrijDoshi https://t.co/Y309duVxXI
— IndiaToday (@IndiaToday) March 17, 2026
Nanda Devi reached : एसटीएस प्रक्रिया आज से शुरू
उन्होंने बताया कि नंदा देवी जहाज 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है, जिसका ट्रांसफर गहरे समुद्र में शिप-टू-शिप (STS) प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा. इस कार्गो को एमटी BW Birch जहाज में स्थानांतरित किया जाएगा और यह प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है. चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने जहाज के कैप्टन और क्रू से मुलाकात कर इस महत्वपूर्ण कार्गो को सुरक्षित पहुंचाने के लिए उनका आभार जताया. साथ ही उन्होंने ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया.
भारत पहुंचने वाला नंदा देवी दूसरा जहाज
एमटी नंदा देवी हाल के दिनों में दूसरा भारतीय एलपीजी जहाज है, जिसने सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार कर भारतीय तट तक पहुंच बनाई है. इससे ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिली है. इससे एक दिन पहले ही एलपीजी कैरियर शिवालिक करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था. अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्गो का एक हिस्सा मुंद्रा में उतारा जाएगा, जबकि बाकी एलपीजी को मैंगलोर भेजा जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में भारतीय जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि जहाजों और उनके क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. मौजूदा हालात में यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
जहाज से हमारे-आपके घर तक एलपीजी गैस पहुंच कैसे पहुंचती है?
जहाज से निकलकर एलपीजी का आपके किचन तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प और व्यवस्थित होता है. इसे हम पोर्ट से चूल्हे तक का सफर कह सकते हैं. ज्यादातर एलपीजी बड़े समुद्री जहाजों के जरिए विदेशों से आती है. जहाज बंदरगाह पर रुकते हैं और बड़े पाइपों के जरिए गैस को किनारे पर बने विशाल ‘इंपोर्ट टर्मिनल्स’ में भेजा जाता है. यहां गैस को बहुत बड़े गोलाकार या बेलनाकार टैंकों में रखा जाता है। इन्हें एलपीजी टर्मिनल कहते हैं.
टर्मिनल से गैस को देश के अलग-अलग हिस्सों में बने ‘बोटलिंग प्लांट’ तक पहुंचाया जाता है. इसके दो मुख्य तरीके हैं —
- एक पाइपलाइन- इसके जरिए जमीन के अंदर बिछी बड़ी पाइपलाइनों के जरिए गैस को सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा जाता है.
- दूसरा रोड टैंकर- इसके तहत सफेद रंग के बड़े बुलेट नुमा ट्रक गैस को सड़क मार्ग से प्लांट तक ले जाते हैं.
इसके बाद गैस बोटलिंग प्लांट तक पहुंचते हैं, जहां सिलिंडर भरे जाते हैं.
यह इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. बोटलिंग प्लांट में गैस को लोहे के सिलिंडरों में भरा जाता है.
सफाई और जांच: खाली सिलिंडरों की बारीकी से जांच की जाती है कि कहीं कोई लीक या डेंट तो नहीं है.
फिलिंग: ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए तय वजन (जैसे 14.2 किलो) के अनुसार गैस भरी जाती है.
सीलिंग: गैस भरने के बाद वाल्व पर सुरक्षा कैप लगाई जाती है और उसे सील कर दिया जाता है. इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए एलपीजी गैस सिलिंडर उपभोक्ताओं यानी हमारे आपके घरों तक पहुंचती है.

