निवेशकों की बढ़ी चिंता, सेंसेक्स 600 अंक नीचे; निफ्टी 22,700 के पार भी नहीं टिक सका

मुंबई (महाराष्ट्र)। भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह की शुरुआत बेहद कमजोर और सुस्त रुख के साथ हुई है। शुरुआती कारोबार के दौरान ही प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 600 से अधिक अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी अपने अहम 22,600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती कारोबार का हाल

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सुबह 10:02 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 616.08 अंक यानी लगभग 0.84 प्रतिशत की जोरदार कमजोरी के साथ 72,155.64 अंकों के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 190.25 अंक (करीब 0.84 प्रतिशत) की गिरावट के साथ फिसलकर 22,590.00 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग एकसमान 0.84% की गिरावट यह दर्शा रही थी कि शुरुआती सत्र से ही बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ था।

दिग्गज शेयरों में बिकवाली और तकनीकी समर्थन स्तर

शेयर बाजार में इस मंदी के दौरान एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) जैसे बाजार के दिग्गजों और हैवीवेट शेयरों ने सूचकांक को सबसे अधिक नीचे खींचने का काम किया। बाजार के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि निफ्टी 22,600 के स्तर से नीचे टिक जाता है, तो यह बिकवाली के दबाव को और अधिक बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक फिसलकर 22,400 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। यह विशेष स्तर पिछले दो वर्षों की मुख्य निचली प्रवृत्ति रेखा (ट्रेंडलाइन) और 200-सप्ताह के ईएमए (EMA) से जुड़ा हुआ है, जो बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सपोर्ट (समर्थन) का काम कर सकता है।

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

भारतीय शेयर बाजार में अचानक आई इस मंदी के पीछे प्रमुख रूप से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता आर्थिक दबाव जिम्मेदार है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें उछलकर 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर के पास पहुंच गई हैं, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय पूंजी बाजार से लगातार अपना पैसा निकाले जाने (कैपिटल आउटफ्लो) के कारण घरेलू निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ है।

तकनीकी दृष्टिकोण से निफ्टी के लिए सपोर्ट जोन

तकनीकी बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए फिलहाल 22,650 से 22,700 के दायरे में तत्काल समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र मौजूद है। इस संबंध में एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे ने अपने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि यदि इस निर्धारित सीमा से नीचे बाजार में कोई निर्णायक गिरावट दर्ज होती है, तो यह अल्पकालिक मंदी (करेक्शन) को और अधिक गहरा सकती है, जो निवेशकों के लिहाज से सतर्क रहने का संकेत है।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुझान

भारतीय घरेलू शेयर बाजार के साथ-साथ एशियाई और यूरोपीय समेत प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला और सुस्त रुख देखने को मिला। टोक्यो समयानुसार सुबह 11:51 बजे तक एसएंडपी 500 (S&P 500) फ्यूचर्स में 0.2 प्रतिशत की नरमी आई, जबकि जापान के निक्केई 225 फ्यूचर्स (OSE) में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, जापान का टॉपिक्स सूचकांक 1.5 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था, हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.1 प्रतिशत लुढ़क गया। हालांकि, इसके विपरीत ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 (S&P/ASX 200) 0.1 प्रतिशत और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

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