हजारों साल पुराना जीवाश्म बना वैज्ञानिकों के लिए पहेली, इंसानों के पूर्वजों से जुड़ी कड़ी मिली

बीजिंग: चीन में खोजे गए लगभग 518 मिलियन साल पुराने एक बेहद अनोखे जीवाश्म ने धरती पर जीवन के शुरुआती विकास और जीवों की उत्पत्ति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वैज्ञानिकों ने इस प्राचीन और दुर्लभ जीव का नाम ‘यूजिंगिया ग्लूटेनोटुनिका’ (Yuengkongia glutinotunika) रखा है। यह ऐतिहासिक खोज कैम्ब्रियन काल (Cambrian Period) से जुड़ी है, जो वह दौर था जब पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता में अचानक भारी तेजी आई थी।

जीवाश्म की विशेषताएँ और अनोखी बनावट

  • स्थान और आकार: यह जीवाश्म चीन के युन्नान प्रांत में स्थित प्रसिद्ध ‘चेंगजियांग बायोटा’ (Chengjiang Biota) क्षेत्र से प्राप्त हुआ है। इस जीव का आकार बेहद छोटा था और इसकी लंबाई मात्र 8 से 22 मिलीमीटर के बीच थी।

  • शारीरिक संरचना: नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता काइयू हे (Kaiyu He) के अनुसार, इस जीव का शरीर एक लंबी बोतल जैसा था, जिसके निचले गोल हिस्से के चारों ओर टेंटेकल्स (Tentacles) यानी तंबू फैले हुए थे। इसका आकार चीन के पारंपरिक मिट्टी के कलश ‘यूजिंगपिंग’ से काफी मिलता-जुलता है, जिसके आधार पर इसका नामकरण किया गया है।

  • पारदर्शी आवरण: इस प्राचीन जीव का बाहरी हिस्सा एक जेली जैसी पारदर्शी झिल्ली (Transparent membrane) से सुरक्षित रूप से ढका हुआ था। उस समय के जीवों में कठोर हड्डियों या कंकाल का विकास नहीं हुआ था।

वैज्ञानिक अवधारणाओं को चुनौती और विकास का नया क्रम

इस खोज की सबसे बड़ी वैज्ञानिक महत्ता ‘एम्बुलाक्रारियंस’ (Ambulacrarians) समूह के विकास को समझने में है। इस बड़े जैविक समूह में आज की स्टारफिश और समुद्री अर्चिन (Sea Urchin) जैसे जीव शामिल हैं। वैज्ञानिकों की अब तक यह पुरानी धारणा थी कि इन जीवों के शुरुआती पूर्वज समुद्र की तलहटी में रेंगने वाले साधारण कीड़े जैसे जीव रहे होंगे, जो केवल पानी से भोजन के कणों को छानकर खाते थे। लेकिन ‘यूजिंगिया’ की जटिल शारीरिक बनावट इस स्थापित धारणा को कड़ी चुनौती देती है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जियोवानी मुसिनी के अनुसार, यूजिंगिया के टेंटेकल्स पानी में तैरते हुए जैविक कणों को सक्रिय रूप से पकड़ने का काम करते होंगे, जबकि कुछ अन्य टेंटेकल्स इसे समुद्र की सतह से मजबूती से चिपके रहने में मदद करते थे। इससे यह साफ होता है कि शुरुआती 'ड्यूटरोस्टोम्स' (Deuterostomes) में भोजन प्राप्त करने की जटिल प्रणालियाँ वैज्ञानिकों के अनुमान से कहीं अधिक पहले विकसित हो चुकी थीं।

मानव विकास और जीवों की ड्यूटरोस्टोम्स वंशावली

यह खोज इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्यूटरोस्टोम्स के विशाल समूह के अंतर्गत इकाइनोडर्मेटा, कॉर्डेटा और हेमिकॉर्डेटा जैसे अत्यंत प्रमुख जैविक समूह आते हैं।

  • कॉर्डेटा (Chordata): मनुष्य और अन्य रीढ़ की हड्डी वाले सभी जीव इसी समूह का हिस्सा हैं।

  • इकाइनोडर्म्स (Echinoderms): स्टारफिश और समुद्री अर्चिन जैसे जीव इस वर्ग में आते हैं।

शोध के अनुसार, बदलते पर्यावरणीय और भौगोलिक हालातों ने इन जीवों को विकास की बिल्कुल अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जहाँ एक ओर 'कॉर्डेट्स' ने भोजन की तलाश में सक्रिय रूप से तैरने और घूमने वाली जीवनशैली अपनाई, जिसके कारण उनके शरीर की आंतरिक संरचना और जटिलताओं में विकास हुआ; वहीं दूसरी ओर स्टारफिश जैसे जीवों ने समुद्र की तलहटी से जुड़े रहने और वहीं के खाद्य कणों पर निर्भर रहने वाली स्थिर जीवनशैली को चुन लिया।

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