30 अरब डॉलर की डील पर अमेरिका-चीन की सहमति, वैश्विक व्यापार में हलचल

वाशिंगटन। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—अमेरिका और चीन के बीच चल रहे लंबे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद, दोनों देशों ने करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ राहत देने और भविष्य की आर्थिक वार्ताओं के लिए एक संयुक्त ट्रेड काउंसिल के गठन पर सहमति जताई है। यह समझौता चीनी राष्ट्रपति के 2015 के बाद पहले वाशिंगटन दौरे के दौरान संपन्न हुआ है।

व्यापारिक समझौते और नए प्रावधान

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नई व्यापार व्यवस्था के तहत अमेरिका से चीन को निर्यात होने वाले कृषि उत्पादों, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स आदि को शामिल किया गया है। वहीं दूसरी ओर, चीन से आने वाले छोटे उपकरणों, खिलौनों और सजावट के सामान पर अधिक अनुकूल टैरिफ दरें तय की गई हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम समझौते से दोनों देशों को भविष्य में एक व्यापक और बड़े व्यापारिक समझौते पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

'सुपर इंटेलिजेंस' और तकनीकी सहयोग

व्यापार के अलावा, दोनों महाशक्तियों ने उभरती हुई तकनीकी के मोर्चे पर भी सहयोग बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। दोनों नेता इस बात पर राजी हुए कि वे इससे जुड़ी संभावनाओं और उसके संभावित जोखिमों पर नियमित चर्चा करेंगे। इस बैठक के दौरान एक दिलचस्प मोड़ यह रहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द के इस्तेमाल पर सहमति बनी, जिसका चीन ने खुलकर स्वागत किया है।

कूटनीतिक और वैश्विक प्रतिबद्धताएं

कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों ने कई अहम मुद्दों पर सहमति जाहिर की है:

  • अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर किसी भी देश या संस्था द्वारा मनमाने ट्रांजिट टोल नहीं लगाए जाने की बात दोहराई गई।

  • वैश्विक शिखर सम्मेलन: आगामी वैश्विक शिखरों और आयोजनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे का सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है।

ट्रेड वॉर की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि साल 2018 से दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा, बौद्धिक संपदा और एकतरफा शुल्कों को लेकर लंबा ट्रेड वॉर चल रहा था। इस दौरान दोनों तरफ से कई बार जवाबी टैरिफ और निर्यात नियंत्रण के उपाय अपनाए गए थे। बहरहाल, इस ताजा समझौते के बाद दुनिया की इन दोनों शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के संबंधों में सुधार की उम्मीद बंध गई है, जिससे वैश्विक बाजार को भी बड़ी राहत मिलने की पूरी संभावना है।

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