West Bengal Election में क्या TMC बनाम EC होगा मुकाबला? EC के एक पार्टी का नाम लेकर अल्टीमेटम देने का क्या है मतलब

West Bengal Election: बुधवार को चुनाव आयोग बंगाल चुनाव में एक पार्टी बन गया जब उसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव “डर, हिंसा, धमकी और प्रलोभन” से मुक्त होने चाहिए.
खासबात ये है कि चुनाव आयोग के इस पोस्ट में सिर्फ तृणमूल कांग्रेस का नाम है. जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग ये चुनाव तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लिख रहा है.

क्या चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है

चुनाव आयोग ने अपनी पोस्ट में अवैध तरीकों के खिलाफ भी चेतावनी दी, जिनमें बूथ कैप्चरिंग, बूथ जैमिंग और “सोर्स जैमिंग” शामिल हैं; सोर्स जैमिंग का मतलब है मतदाताओं को जुटाने या उन तक पहुँचने में रुकावट डालना शामिल है.
लेकिन सवाल ये है कि अगर चुनाव आयोग एक पार्टी का नाम लेकर ये चेतावनी जारी करता है तो उसपर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए भरोसा कैसे किया जा सकता है?

West Bengal Election: चुनाव आयोग ने अपने पोस्ट में क्या लिखा

चुनाव आयोग ने X पर लिखा, “तृणमूल कांग्रेस से ECI की दो-टूक बात.” “इस बार, पश्चिम बंगाल में चुनाव निश्चित रूप से होंगे: डर-मुक्त, हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त, प्रलोभन-मुक्त और बिना किसी छापे, बूथ जैमिंग और सोर्स जैमिंग के.”

पश्चिम बंगाल चुनावों में हिंसा का इतिहास

हलांकि पश्चिम बंगाल में चुनाव से जुड़ी हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है. पिछले 20 सालों में, चुनाव प्रचार और वोटिंग के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों घायल हुए हैं. ‘कॉल ऑफ़ जस्टिस’ की एक फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनाव खास तौर पर हिंसक रहे, जिनमें हिंसा की 1,300 से ज़्यादा घटनाएँ, 25 मौतें और छेड़छाड़ के 7,000 मामले सामने आए. रिपोर्ट में पाया गया कि TMC के शासन में हिंसा का पैमाना अक्सर लेफ्ट फ्रंट के शासन के दौरान बने पिछले रिकॉर्डों को भी पीछे छोड़ गया है.

TMC-EC की बैठक में क्या हुआ

बुधवार को इससे पहले, TMC के एक प्रतिनिधिमंडल और EC के बीच हुई बैठक में तीखी बहस हो गई. TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सात मिनट बाद उनसे “दफ़ा हो जाने” को कहा, जबकि EC ने ओ’ब्रायन पर चिल्लाने और CEC को बोलने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
TMC ने ममता बनर्जी के पत्र सौंपे और उन चुनाव अधिकारियों को लेकर चिंता जताई, जिनका कथित तौर पर BJP से जुड़ाव है.
TMC और EC के बीच चुनावी सूचियों के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर तनाव बढ़ गया है. TMC ने आरोप लगाया है कि EC विपक्षी पार्टी BJP के पक्ष में काम कर रहा है और मतदाताओं को सूची से हटा रहा है.
TMC ने दावा किया है कि जिन 60 लाख मतदाताओं के नामों की जांच चल रही थी, उनमें से 27 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. पश्चिम बंगाल में अब कुल मतदाताओं की संख्या 7,04,59,284 (7.04 करोड़) हो गई है. इसमें वे नाम शामिल नहीं हैं जिनकी जांच अभी चल रही है; SIR प्रक्रिया से पहले यह संख्या 7,66,37,529 (7.66 करोड़) थी.

TMC ने EC पर लगाया ‘सत्ता पर कब्ज़ा’ करने का आरोप

पिछले हफ़्ते, EC ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले 483 अधिकारियों का तबादला किया. यह संख्या उन अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है जहाँ चुनाव होने वाले हैं. इनमें शीर्ष प्रशासक, पुलिस अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी शामिल हैं.
TMC ने इन तबादलों का विरोध करते हुए इन्हें ‘सत्ता पर कब्ज़ा’ बताया, लेकिन EC ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और 2021 की तरह चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए ये ज़रूरी हैं.
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले जाएँगे: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को। नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएँगे.

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