TMC Crisis Saayoni Ghosh : कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ता अंदरूनी विवाद अब एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले चुका है. पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी को थामने के लिए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार (13 जून 2026) को कड़ा रुख अपनाते हुए संगठन में व्यापक फेरबदल की घोषणा की है. कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर वरिष्ठ नेताओं की एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कई कड़े फैसले लिए गए. इस संगठनात्मक फेरबदल में सबसे बड़ी गाज सायोनी घोष पर गिरी है, जिन्हें युवा अध्यक्ष (यूथ प्रेसिडेंट) के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है.
दिल्ली: बागी TMC सांसद सायनी घोष दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचीं. उन्होंने कहा, “मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी. सही समय आने पर ही बोलूंगी.”@sayani06 #newsleader pic.twitter.com/1udmGCtt3J
— News Leader (@NewsLeaderLive) June 14, 2026
इस महत्वपूर्ण बैठक में जहां सायोनी घोष की छुट्टी की गई, वहीं पार्टी के दो वरिष्ठ चेहरों को आगे लाकर असंतोष को शांत करने की कोशिश की गई है. ममता बनर्जी ने कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. आपको बता दें कि इससे पहले उत्तर कोलकाता इकाई का कार्यभार वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की अगुवाई वाली एक कोर कमेटी संभाल रही थी. अब सुदीप बंद्योपाध्याय को हटाकर यह कमान सीधे कुणाल घोष के हाथों में सौंप दी गई है.
TMC Crisis : Saayoni Ghosh की जगह सौगत रॉय को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी नेतृत्व ने संसद के भीतर भी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय पर भरोसा जताया है. सौगत रॉय को लोकसभा में पार्टी का ‘एडवाइजर’ (सलाहकार) नियुक्त किया गया है. यह अहम फैसला अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और टीएमसी के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में लिया गया. माना जा रहा है कि सौगत रॉय के अनुभव का इस्तेमाल कर ममता बनर्जी लोकसभा में बागी सांसदों के रुख को नियंत्रित करना चाहती हैं. यह पूरी उठापटक 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद शुरू हुई है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलेगा टीएमसी का बागी गुट
तृणमूल कांग्रेस वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकटों से गुजर रही है. पार्टी के भीतर काकोली घोष दास्तीदार के नेतृत्व वाले नाराज गुट ने नेतृत्व को खुली चुनौती दे दी है. इस बागी गुट का दावा है कि उन्हें टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों का खुला समर्थन प्राप्त है. इस गुट ने लोकसभा में खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है. खबरों के मुताबिक, यह बागी गुट सोमवार को दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने जा रहा है, जहां वे खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता देने की आधिकारिक मांग करेंगे.
पार्टी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रहीं. नाराज नेताओं द्वारा तैयार किए गए एक गोपनीय पत्र पर पूर्व अध्यक्ष सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसने ममता बनर्जी खेमे की चिंताएं और बढ़ा दी हैं. इसके साथ ही, शनिवार को पूर्व मंत्री मानस भुनिया ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
विधानसभा में भी दिखी बगावत, 64 विधायक हुए अलग
इस बगावत का असर केवल दिल्ली या लोकसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी टीएमसी पूरी तरह बिखरती दिख रही है. सूत्रों के अनुसार, राज्य विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 64 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे से अलग हो चुके हैं. इन बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर सदन में एक अलग पहचान भी हासिल कर ली है.
इतना ही नहीं, बागी गुट के नाराज नेता रीताब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिलने की भी खबर सामने आई है. हालांकि, इस फैसले को ममता बनर्जी खेमे द्वारा कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है. फिलहाल यह पूरा मामला अदालत के विचाराधीन है, लेकिन इस बगावत ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के अस्तित्व पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

