सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी को ज़मीन अलॉटमेंट की जांच के सिलसिले में फ़्रीज़ किए गए चार बैंक अकाउंट चलाने के मामले में राहत देने से मना कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहा है. हाई कोर्ट ने दलीलें सुनीं और मामले की सुनवाई पूजा की छुट्टियों के बाद तय की.
हाई कोर्ट में पेंडिंग पिटीशन की सुनवाई में तेज़ी लाने के अलावा हम दखल नहीं देंगे- SC
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा, “हम इस मामले के मेरिट में जाने से बच रहे हैं क्योंकि इस मुद्दे पर हाई कोर्ट विचार कर रहा है. हाई कोर्ट में पेंडिंग पिटीशन की सुनवाई में तेज़ी लाने के अलावा हम दखल देने के लिए तैयार नहीं हैं.”
उप चुनाव और रोजमर्रा के खर्चों के लिए मांगे पैसे
हाई कोर्ट अकाउंट्स को डी-फ्रीज करने के लिए टीएमसी ममता गुट की पिटीशन पर विचार कर रहा है. टीएमसी ममता गुट ने कहा कि उसे रोज़ाना के खर्चों के लिए हर महीने लगभग ₹19 करोड़ चाहिए और वह इसे घटाकर ₹12.15 करोड़ महीने करने को तैयार है. इसने 6 अक्टूबर को दो विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव का भी ज़िक्र किया.
ममता गुट की ओर से पेश सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी और शोएब आलम ने कोर्ट को बताया कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में तीन अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं. सिंघवी ने कहा, “हर दिन, एक पॉलिटिकल पार्टी की ऑक्सीजन पैरालिसिस में होती है और डेमोक्रेसी में, एक पॉलिटिकल पार्टी, जो देश की तीसरी सबसे बड़ी और पश्चिम बंगाल राज्य में एकमात्र विपक्ष है, उसे राज्य पुलिस पैरालिसिस कर रही है.”
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने ED केस में रोज़ाना के खर्च के लिए तीन अकाउंट्स के लिए एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंट किया है. इस ग्रुप ने कहा कि वे अपना काम नहीं कर पा रहे हैं, खासकर तब जब उपचुनाव होने वाले हैं.
राज्य सरकार और बागी TMC ग्रुप ने भी किया खाते डी फ्रीज़ करने का विरोध
राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गंभीर आरोपों का ज़िक्र किया और कहा कि अकाउंट्स इस शिकायत के आधार पर फ्रीज़ किए गए थे कि सुमित रॉय, जो विधायक अभिषेक बनर्जी के पर्सनल सेक्रेटरी हैं, ने “बहुत ज़्यादा” कैश (₹35 करोड़) जमा किया था. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट इन सभी मामलों पर विचार कर रहा है और उससे सुनवाई में तेज़ी लाने के लिए कहा जा सकता है.
बागी TMC ग्रुप की ओर से पेश हुए सीनियर वकील के परमेश्वर ने बताया कि असली ग्रुप कौन सा है, यह मुद्दा इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) के सामने विचाराधीन है. उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा कोई फ़ैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी एक ग्रुप को बैंक अकाउंट्स ऑपरेट करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.
परमेश्वर ने पहले के इंतज़ाम का ज़िक्र किया और कहा कि हाई कोर्ट ने एक स्पेशल ऑफिसर को रोज़ाना के खर्चे पूरे करने की इजाज़त दी है. उन्होंने कहा कि तीन अकाउंट में काफ़ी पैसे हैं जिनसे यह काम हो सकता है. परमेश्वर ने कहा, “[सुप्रीम] कोर्ट जाने का एकमात्र कारण बैंक से और पैसे निकालना है, जिसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती.”
बेंच ने दलीलों पर गौर किया और कहा कि हाई कोर्ट ने कहा है कि वह आखिर में दोनों पक्षों को सुनेगा. “मेरिट पर कोई भी राय ज़ाहिर करने का वहाँ पेंडिंग मामले पर काफ़ी असर पड़ेगा.”
ECI ने पिछले महीने ममता बनर्जी के ग्रुप को 6 अक्टूबर के उपचुनाव के लिए “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और फुटबॉल प्लेयर का सिंबल दिया था. विरोधी बागी ग्रुप को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम और लिफ़ाफ़ा सिंबल दिया गया था.
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