Azamgarh Voter List नई दिल्ली/आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद के बीच आजमगढ़ से बड़ी खबर सामने आई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था. अब मामले की जांच के बाद निर्वाचन विभाग ने कंप्यूटर सहायक, पांच बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) समेत नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
जांच में ‘विकास यादव’ नाम की कुल 13 प्रविष्टियां सामने आईं. इनमें एक प्रविष्टि गोरखपुर के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित थी. आजमगढ़ से जुड़ी दो प्रविष्टियां पहले ही हटाई जा चुकी थीं, जबकि शेष 11 की जांच की गई. जांच में ये अलग-अलग व्यक्ति पाए गए. इनमें एक व्यक्ति का नाम सही था, जबकि अन्य 10 लोगों के नाम में त्रुटियां मिलीं. सुधार के लिए फॉर्म-8 भरवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
UP electoral roll row: Probe into SP’s allegations found 10 voters wrongly listed as ‘Vikas Yadav’ in Azamgarh. CEO ordered removal of 5 BLOs and a computer assistant from poll duties, besides action against 3 electoral registration officials.
— TOI Lucknow (@TOILucknow) October 24, 2026
इस मामले में कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने के बाद मतदाता सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था मामला
समाजवादी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विकास यादव नाम के युवक को सामने लाकर आरोप लगाया था कि आजमगढ़ की मतदाता सूची में उसके नाम पर कई प्रविष्टियां दर्ज हैं. पार्टी ने इसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला मामला बताया था.
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि एक ही व्यक्ति का नाम कई बार दर्ज होने से फर्जी मतदान की आशंका पैदा होती है. उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस तरह की गड़बड़ियों पर जवाब मांगा था.
मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ से जांच रिपोर्ट मांगी. इसके बाद संबंधित प्रविष्टियों की पड़ताल की गई और मतदाता सूची तैयार करने में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की जांच हुई.
अब जांच में लापरवाही सामने आने और नौ अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी होने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. हालांकि, उपलब्ध जांच विवरण से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि सभी 13 प्रविष्टियां एक ही व्यक्ति की थीं या किसी ने इन सभी के जरिए मतदान किया.
जांच में क्या सामने आया?
जांच के दौरान ‘विकास यादव’ नाम की 13 प्रविष्टियां मिलीं. इनमें से एक गोरखपुर के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र की थी, जो आजमगढ़ के मामले से अलग थी.
आजमगढ़ की संबंधित मतदाता सूची में दो प्रविष्टियां पहले ही हटाई जा चुकी थीं. इसके बाद बाकी 11 प्रविष्टियों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि ये 11 प्रविष्टियां अलग-अलग व्यक्तियों से जुड़ी थीं.
इनमें एक व्यक्ति का वास्तविक नाम विकास यादव था. बाकी 10 व्यक्तियों के नाम गलत दर्ज पाए गए. उनके अन्य विवरणों में भी सुधार की जरूरत बताई गई. इसके लिए फॉर्म-8 भरवाया गया है, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज विवरणों में सुधार के लिए किया जाता है.
कंप्यूटर सहायक और पांच BLO पर गिरी गाज
निर्वाचन विभाग की जांच के बाद मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल छह कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है. इनमें एक कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारी शामिल हैं.
जांच में इन कर्मचारियों को लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है. निर्देशों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों को मतदाता सूची के काम से हटाने और सेवा समाप्ति से संबंधित नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जाएगी.
इसके अलावा दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं. मामले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है.
इस प्रावधान के तहत मतदाता सूची से संबंधित आधिकारिक कर्तव्यों में बिना उचित कारण लापरवाही या चूक के मामलों में कार्रवाई की जा सकती है.
ERO और दो AERO भी जांच के दायरे में
मामले में कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को भी जवाबदेही के दायरे में रखा गया है.
इन तीनों अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
जांच में पर्यवेक्षण संबंधी लापरवाही का भी उल्लेख किया गया है. अधिकारियों की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हो.
इस मामले में अब यह देखा जाएगा कि प्रविष्टियों में गलतियां किस स्तर पर हुईं और संबंधित अधिकारियों ने सत्यापन तथा निगरानी के दौरान अपनी जिम्मेदारी किस हद तक निभाई.
आजमगढ़ की दूसरी विधानसभा सीटों की भी होगी जांच
‘विकास यादव’ नाम से जुड़ी गड़बड़ियों के सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है. जिला निर्वाचन अधिकारी को आजमगढ़ की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.
इसके लिए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है. इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अन्य क्षेत्रों में भी नाम और व्यक्तिगत विवरण दर्ज करने में इसी तरह की त्रुटियां तो नहीं हुई हैं.
यदि दूसरी विधानसभा सीटों पर भी गड़बड़ियां मिलती हैं, तो संबंधित मामलों में अलग से जिम्मेदारी तय की जा सकती है. फिलहाल विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जिले में इस तरह की त्रुटियां कितनी व्यापक हैं.
कांग्रेस ने भी निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल
आजमगढ़ मामले को लेकर कांग्रेस ने भी निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है. पार्टी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में पीलीभीत और आजमगढ़ से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए.
कांग्रेस ने नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई को भी अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया। पार्टी ने निर्वाचन आयोग और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
हालांकि, कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों और निर्वाचन विभाग की जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है. कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से मतदाता सूची में त्रुटियों और प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, लेकिन इससे अपने आप किसी राजनीतिक दल की ओर से फर्जी मतदान कराए जाने का आरोप साबित नहीं होता.
क्या अखिलेश यादव के आरोप सही साबित हुए?
आजमगढ़ की मतदाता सूची में गड़बड़ियां मिलने और नौ अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी होने से अखिलेश यादव द्वारा उठाया गया सवाल प्रशासनिक स्तर पर गंभीर साबित हुआ है. जांच में नाम संबंधी गलतियां सामने आई हैं और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई है.
लेकिन इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है.अखिलेश यादव का आरोप था कि एक व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होने से फर्जी वोटिंग की आशंका पैदा होती है. दूसरी ओर, जांच में आजमगढ़ की 11 संबंधित प्रविष्टियां अलग-अलग व्यक्तियों की पाई गईं, जिनमें 10 के नाम गलत दर्ज थे.
इसलिए यह कहना सही होगा कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और कर्मचारियों की लापरवाही के आरोपों को जांच में समर्थन मिला है लेकिन उपलब्ध निष्कर्षों से यह साबित नहीं होता कि एक ही व्यक्ति के नाम पर 11 या 13 जगह वास्तविक मतदान हुआ था.
अब निर्वाचन विभाग की जांच पर नजर
आजमगढ़ का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और उसमें कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है. सपा समेत विपक्षी दल मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.
अब आजमगढ़ की दूसरी विधानसभा सीटों की जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के नतीजों पर नजर रहेगी. जांच की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद यह पता चल सकेगा कि गलत प्रविष्टियां किस प्रक्रिया के दौरान दर्ज हुईं और उनके सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए.
फिलहाल, इस प्रकरण ने मतदाता सूची में दर्ज नामों, विवरणों के सत्यापन और निर्वाचन अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं.

