कुंडा विधायक राजा भैया अपने पिता और 13 समर्थकों समेत हाउस अरेस्ट,भदरी महल के बाहर भारी पुलिसबल तैनात

Raja Bhaiya House Arrest ,प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज मामला सामने आया है. कुंडा विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह समेत उनके 13 प्रमुख समर्थकों को पुलिस-प्रशासन ने नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया है. प्रशासन की ओर से राजा भैया के ऐतिहासिक आवास ‘भदरी महल’ पर इस कार्रवाई का आधिकारिक नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए किले के बाहर और पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है.

प्रशासन के आदेश के मुताबिक, गुरुवार सुबह 5 बजे से शुरू हुआ यह हाउस अरेस्ट का सिलसिला शुक्रवार रात 9 बजे तक जारी रहेगा. इस दौरान विधायक राजा भैया और उनके पिता कुंडा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भदरी महल से बाहर नहीं निकल सकेंगे और न ही किसी बाहरी भीड़ या जुलूस का नेतृत्व कर पाएंगे.

Raja Bhaiya House Arrest: क्यों हर साल नजरबंद किए जाते हैं राजा भैया और उनके पिता?

इस पूरी कार्रवाई और हर साल मोहर्रम के मौके पर होने वाली इस नजरबंदी के पीछे एक दशक पुराना विवाद है. अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) बृज नंदन राय ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि कुंडा के शेखपुर आशिक गांव में मोहर्रम के दिन ही ताजिए का जुलूस निकाला जाता है. इसी ताजिए के रास्ते में एक हनुमान मंदिर स्थित है, जहां राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह हर साल पूजा-पाठ, सुंदरकांड और भंडारे का आयोजन करने पर अड़े रहते हैं.

पुलिस प्रशासन सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए मोहर्रम के जुलूस के रास्ते में इस तरह के भंडारे की अनुमति नहीं देता है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 2012 में इस मार्ग पर एक बंदर की मौत हो गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक हनुमान मंदिर का निर्माण कराया था. राजा उदय प्रताप सिंह उस बंदर की बरसी के रूप में हर साल मोहर्रम के ही दिन यहां बड़े पैमाने पर भंडारा आयोजित करते हैं.

तनाव का पुराना इतिहास और प्रशासन की सख्ती

इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में कई बार अत्यंत तनावपूर्ण स्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं. साल 2013 और 2014 में जब मोहर्रम का जुलूस और मंदिर का भंडारा एक साथ आयोजित हुआ था, तब कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई थी और भारी बवाल हुआ था. इसके बाद साल 2015 में भी मोहर्रम के दिन भंडारे के कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्षों में भारी हिंसक टकराव और उपद्रव देखने को मिला था.

साल 2015 के उसी बड़े बवाल के बाद से प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाना शुरू किया. तभी से हर साल मोहर्रम के शांतिपूर्ण संपादन के लिए राजा भैया और उनके पिता को भदरी महल में ही नजरबंद कर दिया जाता है, ताकि किसी भी तरह की नई कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो.

इन 13 समर्थकों को भी किया गया है नजरबंद

प्रशासन ने केवल राजा भैया और उनके पिता पर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले उनके 13 खास समर्थकों पर भी शिकंजा कसा है. इन सभी को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नजरबंद किया गया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं:

  1. निर्भय सिंह (बेंती)

  2. जुगनू (विश्वकर्मा, हथिगवां)

  3. हनुमान पांडेय (कुंडा)

  4. जीतेंद्र यादव

  5. आनंद पाली

  6. रमाकांत मिश्रा

  7. भवानी विश्वकर्मा

  8. रवि सिंह

  9. केशरी नंदन पांडेय

  10. जमुना प्रसाद मौर्य

  11. गया प्रजापति

  12. मोहन (हथिगवां)

फिलहाल, शेखपुर आशिक गांव और भदरी महल के आसपास के सभी संवेदनशील चौराहों पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है. खुफिया तंत्र को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से कोई अफवाह न फैल सके और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके.

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