ध्वजारोहण के बाद SC सरपंच के ‘शुद्धिकरण’ का आरोप, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले सरायपाली तहसील के ग्राम किसड़ी से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहाँ पूरा देश समानता और संविधान के उत्सव में डूबा था, वहीं ग्राम पंचायत किसड़ी में आयोजित ध्वजारोहण समारोह के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाले निर्वाचित सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ कथित तौर पर जातिगत भेदभाव और सार्वजनिक अपमान किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित सरपंच ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों द्वारा मंत्रोच्चार करते हुए उनके ऊपर तुलसी जल का छिड़काव कर उनका कथित 'शुद्धिकरण' किया गया। इस घटना से आहत होकर उन्होंने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जाँच और एफआईआर की माँग की है।

क्या है पूरा मामला और सरपंच के गंभीर आरोप?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 15 अगस्त को ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा ग्रामीण, स्थानीय स्कूलों के शिक्षक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद थे। सरपंच नीलमणि रात्रे का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना के वक्त ग्राम पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई और स्कूल के व्याख्याता किशोर रथ ने आपस में 'शुद्धिकरण' को लेकर चर्चा की और उसके बाद मंत्रोच्चार करते हुए उनके ऊपर तुलसी का पानी छिड़क दिया।

सरपंच का कहना है कि उनके गांव में कभी भी इस तरह की कोई कुप्रथा या परंपरा नहीं रही है। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि जब से वे सामान्य सीट से चुनाव जीतकर सरपंच बने हैं, तब तक उन्हें उनकी जातिगत पहचान के कारण लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस में शिकायत और एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की माँग

इस अपमानजनक घटना से दुखी होकर सरपंच नीलमणि रात्रे ने 18 अगस्त 2026 को बलौदा थाना (तहसील सरायपाली, जिला महासमुंद) के थाना प्रभारी को एक लिखित आवेदन सौंपा है। अपनी शिकायत में उन्होंने किशोर रथ, पृथ्वीराज भोई और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की गहराई से जाँच करने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।

पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस पूरी घटना का वीडियो और फोटोग्राफ सबूत के तौर पर पेन ड्राइव में मौजूद है, जिसे उन्होंने साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके अलावा, शिकायत पत्र में शौकीलाल नायक, विजय रात्रे, केदार महापात्रा, अलेख साहू, उग्रसेन नायक, दुतिया रात्रे, मोहन लाल रात्रे और पंचम रात्रे जैसे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्षदर्शी गवाह के रूप में दर्ज कराया गया है।

सामाजिक प्रतिक्रिया और तीखे सवाल

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद इलाके के सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता संजीत बर्मन समेत कई अन्य लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समानता पर एक बड़ा आघात बताया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से गहन जाँच कर रही है, और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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