फिर गायब हुई ओम पर्वत की बर्फ, पर्यावरणविदों की बढ़ी चिंता; जानें पहले कब हुआ था ऐसा

Om Parvat Snowless पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में स्थित विश्व प्रसिद्ध ओम पर्वत एक बार फिर बर्फविहीन नजर आ रहा है. पर्वत पर बर्फ से बनने वाली प्राकृतिक ‘ॐ’ की आकृति पूरी तरह गायब हो गई है. इससे श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ गई है.

उच्च हिमालयी क्षेत्र से धारचूला लौटीं एक स्थानीय निवासी ने ओम पर्वत की ताजा स्थिति मीडिया के साथ साझा की है. उनके मुताबिक, पर्वत को नजदीक से देखने पर वहां बर्फ की वह आकृति दिखाई नहीं दी, जिसके दर्शन के लिए हर साल श्रद्धालु और पर्यटक व्यास घाटी पहुंचते हैं. बर्फ हटने के बाद पर्वत का काला हिस्सा साफ नजर आ रहा है.

समुद्रतल से करीब 15,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. पर्वत की चट्टानों पर बर्फ से बनने वाली ‘ॐ’ जैसी आकृति इसकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है. यही वजह है कि यहां बर्फ का लगातार कम होना केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि हिमालयी पर्यावरण में हो रहे बदलावों का संकेत भी माना जा रहा है.

Om Parvat Snowless:पहली बार कब गायब हुई थी बर्फ?

हिमालय की पहाड़ियां सदियों से बर्फ की मोटी परत से ढंकी रहती हैं. ओम पर्वत की बात करें तो सैंकड़ों वर्षों से यहां श्रद्धालु प्रकृति के इस अद्भभुत स्वरुप बर्फ से लिखी  ऊं  को देखने आये हैं लेकिन 2024 में पहली बार ऐसा हुआ जब इस पवित्र     ओम पर्वत से बर्फ पूरी तरह गायब हो गई थी.  उस समय 16 अगस्त को पर्वत का निरीक्षण करने पहुंचे लोगों ने बताया था कि वहां बर्फ की प्राकृतिक ‘ॐ’ आकृति दिखाई नहीं दे रही थी. पर्वत लगभग काला नजर आया था. बाद में बर्फबारी होने पर इसकी आकृति दोबारा उभर आई थी.

पिछले साल अगस्त 2025 में भी ओम पर्वत पर बर्फ पिघलने की खबर सामने आई थी. इस वर्ष जनवरी में भी पर्वत से बर्फ काफी हद तक गायब दिखाई दी थी.

अब अगस्त 2026 में एक बार फिर यही स्थिति सामने आने से बर्फ पिघलने की बढ़ती घटनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस पहाड़ से बर्फ का गयाब होना बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन को दर्शाता है. हालांकि, मौजूदा स्थिति का वास्तविक आकलन करने के लिए मौसम, तापमान, बर्फ की मोटाई और ग्लेशियर क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे जरूरी होगा.

पहाड़ों में भू स्खलन से लोग परेशान

उधर पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण ग्राम पंचायत रीठा रैतोली में भू-धंसाव और भूस्खलन की स्थिति गंभीर हो गई है. कई स्थानों पर जमीन में गहरी दरारें पड़ गई हैं, जिससे आवासीय मकानों पर खतरा मंडरा रहा है.

असुर गांव में कृष्णानंद कापड़ी के घर के पीछे भारी भू-धंसाव हुआ है. जमीन खिसकने से क्षेत्र से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के बिजली के पोल टेढ़े हो गए हैं. सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने 16 अगस्त की सुबह से रीठा, असुर, रैतोली और ठांगा गांवों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है.

रैतोली गांव में गंगा नदी के किनारे कटाव और भूस्खलन से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है. राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है. लगातार बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में बदलती परिस्थितियों ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की चुनौती सामने ला दी है.

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