तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 61 विधायक ममता बनर्जी की विधायक दल की बैठक में नहीं हुए शामिल, जानिए क्या है वजह

तृणमूल कांग्रेस (TMC) Trinamool Congress ने रविवार को चेयरपर्सन ममता बनर्जी के कोलकाता घर पर होने वाली अपनी लेजिस्लेचर पार्टी की मीटिंग टाल दी, क्योंकि 80 में से सिर्फ़ 19 MLA ही क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की जांच पर चर्चा करने के लिए आए. पार्टी नेताओं ने यह जानकारी दी कि यह जांच सोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता (LoP) नॉमिनेट करने वाले एक लेटर में उनके कुछ सिग्नेचर की कथित जालसाजी के मामले में हुई थी.
TMC के 80 में से कम से कम 30 MLA को LoP को नॉमिनेट करने वाले लेटर पर साइन करने की ज़रूरत है.

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के खिलाफ सड़क पर थे विधायक- कुणाल घोष

पार्टी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और कोलकाता के बेलियाघाटा से MLA कुणाल घोष ने दावा किया कि ज़्यादातर MLA नहीं आ सके क्योंकि वे शनिवार दोपहर पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ सड़कों पर प्रोटेस्ट कर रहे थे.
घोष ने कहा, “घटना के बाद कई MLA ने कल लीडरशिप को फोन करके कहा कि वे आंदोलन करेंगे और इसलिए मीटिंग टाल दी जानी चाहिए. कुछ ने आज भी फोन किया. जो लोग आ पाए, उनसे हमारी कुछ बातचीत हुई. अगली मीटिंग की घोषणा जल्द ही की जाएगी.”
2 जून को ममता बनर्जी एक दिन का आंदोलन करेंगी
घोष ने आगे कहा, “हमने तय किया है कि शनिवार को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और रविवार को MP कल्याण बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में कल पूरे बंगाल में सब-डिवीजन और कम्युनिटी ब्लॉक में आंदोलन किए जाएंगे. 2 जून को ममता बनर्जी रानी रश्मोनी रोड पर एक दिन का आंदोलन करेंगी.”

Trinamool Congress के 61 विधायकों की गैर हाजिरी पर उठ रहे सवाल

बंगाल की 294 सीटों में से 207 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के TMC को हराने के कुछ हफ़्ते बाद ही MLA की इतनी बड़ी संख्या में गैरहाज़िरी ने पार्टी के अंदर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अभिषेक बनर्जी सोमवार को जालसाज़ी मामले में पूछताछ के लिए CID ऑफिस जाने वाले हैं.
उन्हें शनिवार को साउथ 24 परगना ज़िले के सोनारपुर में कथित तौर पर कुछ TMC कार्यकर्ताओं द्वारा हाथापाई किए जाने से कुछ घंटे पहले बुलाया गया था.
हिदुस्तान टाइम्स ने एक MLA के हवाले से छापा है कि, “इतने सारे MLAs की गैरहाज़िरी सवाल खड़े करती है. अगर मालदा ज़िले के MLA अब्दुर रहीम बॉक्सी और नादिया के MLA रुकबानुर रहमान कालीघाट आ सकते हैं, तो यह समझ से बाहर है कि कोलकाता के जावेद अहमद खान या संदीपन साहा अपनी गैरहाज़िरी के लिए क्यों जाने जाते थे.”

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